आंखों में देखकर बात नहीं करते ये लोग, जानें Psychology के पीछे की वजह

punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 03:54 PM (IST)

नारी डेस्क : क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ लोग आपसे बात करते समय बार-बार नजरें हटा लेते हैं? वे कभी नीचे देखते हैं, कभी इधर-उधर देखने लगते हैं या लगातार सामने वाले की आंखों में देखने से बचते हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर तुरंत मान लेते हैं कि सामने वाला झूठ बोल रहा है, कुछ छिपा रहा है या उसे बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता।

मुश्किल सवाल पर सोचने की कोशिश

कई बार इंसान किसी मुश्किल सवाल का जवाब सोचते समय सामने वाले से नजरें हटा लेता है। शोध में पाया गया है कि कठिन सवालों का जवाब देते समय लोग सोचने के लिए अपनी नजरें दूसरी दिशा में कर सकते हैं। इससे उन्हें ध्यान केंद्रित करने और जरूरी जानकारी याद करने में मदद मिल सकती है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति आपसे बात करते हुए अचानक नीचे या दूसरी तरफ देखने लगे, तो जरूरी नहीं कि वह आपकी बात से बच रहा हो। हो सकता है कि वह अपने दिमाग में सही जवाब तैयार करने की कोशिश कर रहा हो।

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घबराहट भी हो सकती है वजह

कुछ लोगों के लिए लगातार आंखों में आंखें डालकर बात करना सहज नहीं होता। उन्हें लग सकता है कि सामने वाला उन्हें जज कर रहा है या उनकी बात को गलत समझ सकता है। ऐसे में नजरें हटाना उनके लिए खुद को थोड़ा सहज महसूस करने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, कम आई कॉन्टेक्ट को सीधे तौर पर शर्मीलापन या आत्मविश्वास की कमी से जोड़ना भी सही नहीं है। 2022 की एक रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों ने आई कॉन्टेक्ट को लेकर ज्यादा कठिनाई महसूस होने की बात कही, उनके वास्तविक आमने-सामने के व्यवहार में जरूरी नहीं कि उतना ही ज्यादा नजरें चुराना दिखाई दे।

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ध्यान लगाने में भी मिल सकती है मदद

किसी मुश्किल या सोचने वाले काम के दौरान नजरें हटाना दिमाग को बाहरी चीजों से थोड़ा दूर करके जरूरी जानकारी पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि कोई व्यक्ति बातचीत के दौरान लगातार आपकी आंखों में देखने के बजाय कुछ पल के लिए दूसरी तरफ देख सकता है और फिर दोबारा आपकी ओर देखने लग सकता है।

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सामने वाला गलत समझ सकता है

आंखों का संपर्क बातचीत करने वाले दोनों लोगों को प्रभावित करता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार नजरें चुरा रहा है, तो सामने वाला इसे उदासीनता, असहजता या झूठ बोलने के संकेत के रूप में समझ सकता है। हालांकि, सिर्फ आई कॉन्टेक्ट के आधार पर किसी व्यक्ति के इरादे या व्यक्तित्व का फैसला करना सही नहीं माना जाता। वहीं, बातचीत के दौरान थोड़ा-बहुत आई कॉन्टेक्ट बातचीत को सहज बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि सामने वाले को लगातार घूरकर देखना जरूरी है।

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हर बार झूठ का संकेत नहीं

अगर कोई व्यक्ति आपसे बात करते समय आंखों में नहीं देखता है, तो तुरंत यह निष्कर्ष न निकालें कि वह झूठ बोल रहा है या आपसे कुछ छिपा रहा है। वह सोच रहा हो सकता है, घबरा रहा हो सकता है, ध्यान लगाने की कोशिश कर रहा हो सकता है या उसकी बातचीत की आदत ही ऐसी हो सकती है। इसलिए किसी व्यक्ति को समझने के लिए सिर्फ उसकी आंखों के संपर्क पर निर्भर रहने के बजाय उसके पूरे व्यवहार, बातचीत के तरीके और परिस्थिति को देखना ज्यादा बेहतर है।


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Content Editor

Monika

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