मेरी बात का गलत अनुवाद हुआ', रानी पद्मावती को कायर कहने के आरोप पर ट्रोल हुईं स्वरा भास्कर
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 11:58 AM (IST)
नारी डेस्क: बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला फिल्म 'पद्मावत' के जौहर सीन से जुड़ा है। हाल ही में एक कार्यक्रम में दिए गए उनके बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद उन पर रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को 'कायर' कहने का आरोप लगाया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया गया। अब स्वरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इस पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी है। एक्ट्रेस का कहना है कि उनके बयान का जानबूझकर गलत अनुवाद किया जा रहा है और उनकी बात को एक अलग अर्थ देकर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कभी 'कायर' नहीं कहा।
'मैंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा'
अपने वीडियो में स्वरा ने कहा कि सुबह से सोशल मीडिया और ट्विटर पर उनके एक पुराने क्लिप को लेकर चर्चा हो रही है। उन्होंने बताया कि यह बयान उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान दिया था, जहां उनसे संजय लीला भंसाली को लिखे गए उनके ओपन लेटर के बारे में सवाल पूछा गया था। स्वरा के मुताबिक, उस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने अपनी असल आपत्ति समझाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी कही बात का गलत तरीके से अनुवाद किया गया। उनका कहना है कि इसी गलत अनुवाद को आधार बनाकर यह कहानी फैलाई जा रही है कि उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली अन्य महिलाओं को कायर बताया। एक्ट्रेस ने ट्रोल करने वालों से कहा कि अगर उन्हें गाली देनी है तो दें, लेकिन कम से कम सही बात के आधार पर दें।
क्या कहा था स्वरा ने
स्वरा ने अपने वीडियो में अपने मूल बयान का संदर्भ समझाते हुए कहा कि 'पद्मावत' का क्लाइमैक्स देखते समय उनके मन में एक अलग तरह का विचार आया था। उन्होंने बताया कि फिल्म देखते हुए उन्हें लगा कि अगर कभी वह बलात्कार की शिकार होतीं और उन्हें ऐसा लगता कि खुद को खत्म कर लेना ही बेहतर विकल्प है, तो वह खुद को कायर समझतीं। उनके मुताबिक, यह बात रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं के बारे में नहीं थी। वह दरअसल बलात्कार के बाद जिंदा बचने वाली महिलाओं और समाज की सोच पर सवाल उठा रही थीं।
'क्या जान दे देना ही एकमात्र विकल्प है
स्वरा ने अपने बयान के जरिए फिल्मों और समाज में महिलाओं की 'इज्जत' और जिंदगी को लेकर बनी सोच पर भी सवाल उठाया। उनका सवाल था कि क्या ऐसी कहानियां दिखाई जानी चाहिए, जिनसे यह संदेश जाए कि किसी महिला की शारीरिक पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बलात्कार से बची किसी महिला को यह महसूस कराया जाना चाहिए कि अगर उसकी जान चली जाती तो बेहतर होता। स्वरा के मुताबिक, किसी भी सर्वाइवर के जिंदा बचने को कमतर नहीं समझा जाना चाहिए।
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निर्भया का उदाहरण देकर रखी अपनी बात
अपनी सफाई में स्वरा ने दिल्ली में हुए निर्भया कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निर्भया ने अपनी आखिरी सांस तक अपने साथ हुए अत्याचार का सामना किया था। एक्ट्रेस ने महिलाओं के जीने की इच्छा और उनके संघर्ष को महत्व देने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी महिला के जिंदा रहने की इच्छा को कभी कम नहीं आंकना चाहिए।
31 अगस्त के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'महिला जीवन स्वतंत्रता' कार्यक्रम के दौरान स्वरा की कही बातों के बाद शुरू हुआ। कार्यक्रम में उन्होंने फिल्म 'पद्मावत' के जौहर सीन पर बात की थी। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती का किरदार निभाया था। फिल्म के क्लाइमैक्स में बड़ी संख्या में महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाया गया था। इसी दृश्य को लेकर स्वरा पहले भी अपनी आपत्ति जाहिर कर चुकी हैं।

2018 में भी भंसाली को लिखी थी खुली चिट्ठी
'पद्मावत' के जौहर सीन को लेकर स्वरा की आपत्ति नई नहीं है। फिल्म की रिलीज के समय, 2018 में उन्होंने निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक ओपन लेटर लिखा था। इस चिट्ठी में उन्होंने जौहर और सती जैसी प्रथाओं के फिल्मी चित्रण पर सवाल उठाए थे। स्वरा का तर्क था कि महिलाओं के जीवन और उनकी अहमियत को उनकी सेक्सुअलिटी या तथाकथित 'पवित्रता' से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
करीब आठ साल बाद इसी मुद्दे पर दोबारा बात करने के बाद एक्ट्रेस का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, अपने ताजा वीडियो में स्वरा ने स्पष्ट किया है कि उनके बयान का मकसद रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहना नहीं था, बल्कि वह महिलाओं के जीवन, बलात्कार के बाद सर्वाइव करने और समाज की सोच पर सवाल उठा रही थीं।

