राधा की अंतिम इच्छा सुन कृष्ण की भर आई थी आंखें, फिर गुस्से में तोड़ दी अपनी बांसुरी

punjabkesari.in Thursday, Sep 03, 2026 - 06:13 PM (IST)

नारी डेस्क: जब कभी प्रेम और त्याग की बात की जाती है तो कृष्ण और राधा का नाम सबसे पहले आता है। भले ही बांसुरी वाले  का विवाह रूकमनी के साथ हुआ लेकिन  कृष्ण के साथ हमेशा राधा का नाम ही जुड़ता है। हमने राधा- कृष्ण की कहानियां तो कई सुनी हैं, लेकिन इस बात से कई लोग अनजान हैं कि राधा के अंतिम समय में  कृष्ण ने आखिरी बार बांसुरी बजाई थी और फिर इसे तोड़कर अपने से अलग कर दिया था। 

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 बांसुरी की धुन से खिंची आती थी राधा

बांसुरी भगवान कृष्ण की प्रेममयी और करुणामयी भावनाओं का प्रतीक है। जब कृष्ण बांसुरी बजाते थे, तो गोपियों और ग्वाल-बालों के हृदय प्रेम और भक्ति से भर जाते थे। बांसुरी की मधुर ध्वनि उनके अलौकिक प्रेम का संदेश देती है। कृष्ण की बांसुरी की धुन ही थी जिससे राधा श्रीकृष्ण की तरफ खिंची चली गईं. राधा की वजह से श्रीकृष्ण बांसुरी को हमेशा अपने पास रखते थे, लेकिन राधा की मृत्यू के बाद उन्होंने बांसुरी को हमेशा के लिए खुद से अलग कर दिया था। 


 कृष्ण से दूर हो गई थी राधा 

प्रचलित कहानी के मुताबिक कंस वध के बाद श्रीकृष्ण द्वारका बस गए और रूकमनी से शादी कर ली। उन्होंने अपने पति धर्म को बखूबी निभाया लेकिन उनके मन में हमेशा राधा का ही वास रहा। सारे कर्तव्यों से मुक्त होने के बाद राधा आखिरी बार अपने प्रियतम कृष्ण से मिलने गईं। जब वह द्वारका पहुंचीं तो उन्होंने कृष्ण की रुक्मिनी और सत्यभामा से विवाह के बारे में सुना लेकिन वह दुखी नहीं हुईं।  राधा के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक देविका के रूप में नियुक्त किया।  राधा दिन भर महल में रहती थीं और महल से जुड़े कार्य देखती थीं। मौका मिलते ही वह कृष्ण के दर्शन कर लेती थीं, लेकिन महल में राधा ने श्रीकृष्ण के साथ पहले की तरह का आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही थीं इसलिए राधा ने महल से दूर जाना तय किया। 

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राधा का वियोग सह नहीं पाए कृष्ण 

धीरे-धीरे समय बीता और राधा बिलकुल अकेली और कमजोर हो गईं। उस वक्त उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की आवश्यकता पड़ी। आखिरी समय में भगवान श्रीकृष्ण उनके सामने आ गए। आखिरी मिलन पर श्रीकृष्ण ने राधा से कुछ मांगने के लिए कहा। तब राधा ने उनसे आखिरी बार बांसुरी बजाने की इच्छा जताई। श्रीकृष्ण की बांसुरी की सुरीली धुन सुनते-सुनते ही राधा ने अपना शरीर त्याग दिया।  कान्हा राधा के आध्यात्मिक रूप और कृष्ण में विलिन होने तक बांसुरी बजाते रहे। भगवान राधा-श्रीकृष्ण का प्रेम अमर है लेकिन फिर भी श्रीकृष्ण राधा का वियोग सह ना पाए और उन्होंने प्रेम के प्रतीक बांसुरी को तोड़कर फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने बांसुरी या कोई भी वादक यंत्र नहीं बजाया।


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vasudha

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