मृत्यु के बाद क्यों बांधी जाती हैं पैरों की उंगलियां? जानिए धार्मिक और आध्यात्मिक कारण

punjabkesari.in Saturday, Aug 30, 2025 - 05:32 PM (IST)

नारी डेस्क : हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कई तरह की क्रियाएं की जाती हैं। हर एक प्रक्रिया का अपना महत्व और कारण होता है। इन्हीं में से एक है मृत व्यक्ति के पैरों के अंगूठों को बांधना। अक्सर आपने देखा होगा कि जब किसी का देहांत होता है, तो सबसे पहले शव के दोनों पैरों के अंगूठों को एक साथ बांध दिया जाता है। लेकिन आखिर क्यों किया जाता है ऐसा? इसके पीछे गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

मृत्यु और आत्मा का संबंध

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके प्राण निकलते ही आत्मा शरीर को छोड़ देती है। यह प्रकृति का नियम है। माना जाता है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा अपने परिजनों के दुख और विलाप को महसूस करती है। यही कारण है कि शव का दाह संस्कार किया जाता है, ताकि आत्मा शरीर और परिवार के बंधन से मुक्त होकर यमलोक की यात्रा पर निकल सके।

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पैरों के अंगूठे क्यों बांधे जाते हैं?

पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा कभी-कभी अपने पुराने शरीर में लौटने की कोशिश करती है। माना जाता है कि आत्मा शरीर के किसी भी खुले हिस्से से प्रवेश कर सकती है, लेकिन खास तौर पर इसका संबंध मूलाधार चक्र से होता है। मूलाधार चक्र, जो रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में स्थित है, जीवन ऊर्जा का केंद्र माना जाता है और यहीं से जीवन की शुरुआत होती है। इसी कारण मृत्यु के बाद मृतक के दोनों पैरों के अंगूठों को आपस में बांध दिया जाता है, ताकि मूलाधार चक्र स्थिर रहे और आत्मा का वापस शरीर में लौटना असंभव हो जाए।

आत्मा को मोहमुक्त करना क्यों जरूरी है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि आत्मा मृत्यु के बाद दोबारा शरीर में लौट आती है तो वह मोक्ष की ओर नहीं बढ़ पाती और सांसारिक बंधनों में ही फंसी रह जाती है। इसी कारण मृत्यु के बाद पैरों की उंगलियां बांधने की परंपरा निभाई जाती है। यह प्रक्रिया आत्मा को उसके मोह से दूर कर देती है और उसे परिवार तथा शरीर से पूरी तरह अलग कर, अगले सफर यानी यमलोक की ओर जाने के लिए तैयार करती है।

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आत्मा का आगे का सफर

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को सबसे पहले यमलोक जाना पड़ता है, जहां यमराज उसके कर्मों का मूल्यांकन करते हैं। जिसने जीवन में अच्छे कर्म किए होते हैं, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है और वह सुख का अनुभव करता है। वहीं, बुरे कर्म करने वालों को नर्क में सजा भुगतनी पड़ती है। इसी कारण हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद होने वाली हर प्रक्रिया को बेहद सोच-समझकर और परंपरा के अनुसार किया जाता है, ताकि आत्मा अपने अगले सफर के लिए सही मार्ग पर अग्रसर हो सके।

मृत्यु के बाद पैरों की उंगलियां बांधने की परंपरा केवल एक धार्मिक रीति नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी आध्यात्मिक मान्यता छिपी हुई है। यह प्रक्रिया आत्मा को शरीर से पूरी तरह अलग कर देती है, ताकि वह अपने नए सफर पर बिना रुकावट आगे बढ़ सके।


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Content Writer

Vandana

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