मांस-मदिरा मांगने वाले भैरोनाथ को क्यों दिया जाता है कन्या पूजन में हलवा-पूड़ी का भोग

punjabkesari.in Saturday, Apr 05, 2025 - 01:12 PM (IST)

 नारी डेस्क: नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन के समय कई खास परंपराएं निभाई जाती हैं, जिसमें एक लड़के को भी कन्याओं के साथ बैठाकर उसे हलवा-पूड़ी का भोग दिया जाता है। यह लड़का खासतौर पर भैरोनाथ का रूप माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है? आइए जानें इस परंपरा के पीछे की कहानी और उसका महत्व।

कन्या पूजन में लड़का बैठाने की परंपरा

नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दौरान 9 कन्याओं को मां दुर्गा के 9 रूपों के रूप में पूजते हैं। परंतु, इन 9 कन्याओं के साथ एक लड़के को भी बैठाया जाता है, जिसे लंगूरा, लांगुरिया या बटुक कहा जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में इस लड़के के रूप में अलग-अलग देवताओं की पूजा की जाती है, जैसे कि हनुमान जी या शिवजी के रूप में भैरोनाथ की पूजा की जाती है।

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भैरोनाथ और मां दुर्गा की कथा

कन्या पूजन के दौरान भैरोनाथ को विशेष रूप से क्यों पूजा जाता है, इसके पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि जब माता वैष्णो ने भैरोनाथ को उनके कुकर्मों की वजह से सजा दी थी, तो उन्होंने मां से माफी मांगते हुए यह वचन लिया कि अब मां के दर्शन के बाद भैरोनाथ के दर्शन भी अनिवार्य होंगे। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के पूजन के साथ भैरोनाथ की पूजा भी की जाती है।

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भैरव बाबा की उपस्थिति का महत्व

कन्या पूजन में भैरोनाथ को बैठाने का महत्व यह है कि उन्हें मां दुर्गा का रक्षक और सेनापति माना जाता है। शास्त्रों में यह कहा गया है कि शक्ति पूजा में भैरोनाथ का पूजन अनिवार्य होता है, क्योंकि भैरव के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। तंत्र विद्या के अनुसार, देवी की पूजा में भैरोनाथ का आह्वान बहुत जरूरी है। ऐसा माना जाता है कि इस आह्वान से पूजा पूरी होती है और कोई भी बाधा पूजा के मार्ग में नहीं आती।

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भैरोनाथ का सिर गिरने के बाद माफी और वरदान

कथा के अनुसार, जब भैरोनाथ ने मां की चेतावनी को नजरअंदाज किया, तो मां ने महाकाली का रूप धारण कर उनका वध किया। भैरोनाथ का सिर करीब 8 किमी दूर घाटी में गिरा, जिसे भैरो घाटी कहा जाता है। इसके बाद भैरोनाथ ने मां से माफी मांगी और मां ने उन्हें माफ करते हुए यह वरदान दिया कि उनके दर्शन के बाद ही मां के दर्शन पूर्ण माने जाएंगे।

इसलिए, नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन में लड़के को भैरोनाथ के रूप में बैठाना और उसे भोग अर्पित करना एक धार्मिक परंपरा है, जिसका उद्देश्य पूजा को सम्पूर्ण और प्रभावी बनाना है।
 
 

 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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