अष्टमी और नवमी, नवरात्रि में कन्या पूजन कब करना है सही? शुभ मुहूर्त जानने के लिए पढ़ें ये पूरी खबर
punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 12:51 PM (IST)

नारी डेस्क: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व है, इस दौरान कंजक पूजन किया जाता है जो देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा का प्रतीक होता है। इसमें 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। हालांकि इस दौरान वास्तु के कुछ नियमों का भी ध्यान रखना जरूरी है, सही तरीके से पूजन करने से माता की कृपा और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
ये है कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के मुताबिक अष्टमी तिथि 4 अप्रैल 2025 की रात 8:12 बजे शुरू होगी और इसका समापन 5 अप्रैल 2025 को शाम 7:26 बजे होगा. उदिया तिथि के अनुसार अष्टमी 5 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी, इसके बाद 6 अप्रैल को नवमी तिथि आएगी। महाअष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक है। वहीं महानवमी पर सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 तक कन्या पूजन किया जा सकता है।
कन्या पूजन की तैयारी
2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजें। एक बालक (लांगुरिया) को भी साथ बैठाना शुभ माना जाता है। कन्याओं को आदर से घर बुलाएं। उनके पैर धोकर आसन पर बैठाएं। उनके माथे पर कुमकुम और हल्दी से तिलक लगाएं। अक्षत (चावल) चढ़ाएं और फूल अर्पित करें।दीपक जलाकर कन्याओं की आरती करें। प्रेमपूर्वक पूड़ी, चने और हलवा का भोजन कराएं। भोजन और उपहार देने के बाद उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें, उन्हें प्रसन्नता से विदा करें।

कंजक पूजन में कन्याओं को क्या दें
भोजन में पूड़ी, काले चने, हलवा, साथ में फल या मिठाई भी रख सकते हैं। उपहार में लाल या पीले रंग के कपड़े (दुपट्टा, फ्रॉक आदि) दे सकते हैं। इसके अलावा चूड़ियां, बिंदी, कंघी, रिबन छोटी पोटली में कुछ पैसे (शगुन के तौर पर ₹10, ₹20 आदि) भी कन्याओं को दे सकते हैं। शिक्षा से जुड़ी चीजें पेंसिल, कलर बॉक्स, किताबें या टिफिन बॉक्स, बोतल जैसी चीजें भी उपहार के तौर पर दिया जा सकता है।
कन्या पूजन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- पूजन के लिए 2 से 10 साल की कन्याएं उपयुक्त मानी जाती हैं।
- पूजन से पहले घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई जरूरी है।
- किसी कन्या को ज़्यादा देना, किसी को कम देने की गलती ना करें, इससे पूजन का पुण्य कम हो जाता है।
- देवी का पूजन श्रद्धा और प्रसन्नता से करें, तभी उसका फल मिलता है।
- पूजन के बाद कन्याओं का आदर करें, उन्हें प्रेम से विदा करें।