9 कन्याओं के साथ एक बालक को बैठाना होता है जरूरी, नहीं तो अधूरा माना जाएगा ''कंजक पूजन''
punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 03:22 PM (IST)

नारी डेस्क: माना जाता है कि नवरात्रि के दिनों में भगवती मां दुर्गा पूरे नौ दिन तक धरती पर रहती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का विधान है। इस पूजा में 9 कन्याओं को भोजन कराना सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि वे मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक होती हैं। कन्या पूजन के साथ ही एक बालक को भी पूजा जाता है, आइए, जानते हैं कन्याओं के बीच बालक को बैठाना क्यों होता है जरूरी।

भगवान शिव के बाल रूप है बटुक भैरव
यह लड़का बटुक भैरव (भगवान शिव के बाल रूप) का प्रतीक होता है, जो काल भैरव से कम उग्र और जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। मान्यता है कि बिना बालक के कन्या पूजन अधूरा माना जाता है। यह लड़का पूजा में संपूर्णता और संतुलन बनाए रखने का संकेत देता है। कहते हैं कि जहां भैरव विराजमान होते हैं, वहां हो रहे शुभ कार्यों में कोई विघ्न नहीं पड़ता क्योंकि भैरव सभी नकारात्मक शक्तियों से लड़ते हैं और देवी स्थान की रक्षा करते हैं। उनके मर्जी के बिना कोई भी देवी स्थान पर कदम नहीं रख सकता
लड़के के स्थान पर रख सकते हैं नारियल
अगर पूजा में कोई लड़का न मिले तो केवल कन्याओं का पूजन भी कर सकते हैं, यह भी पूरी तरह शुभ होता है। लड़के के स्थान पर पूजा में भगवान भैरवका ध्यान करें। एक छोटा नारियल (श्रीफल) रखकर उसे प्रतीक रूप में बालक माना जा सकता है। बटुक भैरव का प्रसाद आप कुत्ते को भी दे सकते हैं। इसका कारण यह है कि कुत्ता, भैरव बाबा का वाहन माना जाता है।

कन्याओं को कैसे करें प्रसन्न?
कन्या पूजन का मुख्य उद्देश्य कन्याओं का सम्मान और उन्हें खुश करना होता है। उन्हें साफ-सुथरे स्थान पर बिठाकर पूजा करें। हलवा, पूड़ी, चना, मिठाई का प्रसाद दें। उन्हें गिफ्ट, कपड़े, खिलौने, चूड़ियां, बिंदी, रुमाल आदि दें। उन्हें पैर धोकर सम्मान दें और फिर पैर छूकर आशीर्वाद लें। विदाई के समय उन्हें प्रसन्न मुद्रा में घर से बाहर भेजें। कन्याओं को आदर, प्रेम और खुशी से पूजन करके माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।