चैत्र नवरात्रि व्रत पारण में इन बातों का रखें ध्यान, व्रत फलित करने के लिए जरूरी हैं ये  नियम

punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 09:47 AM (IST)

नारी डेस्क: चैत्र नवरात्रि 2025 का समापन 6 अप्रैल 2025 को महानवमी के दिन होगा। इस दिन मां दुर्गा की नौवीं शक्ति, मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत का पारण, कन्या पूजन और हवन के साथ किया जाता है। लेकिन व्रत पारण करते समय कुछ खास नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यदि सही तरीके से व्रत पारण नहीं किया गया, तो व्रत का फल प्राप्त नहीं होता है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि व्रत पारण की सही विधि और नियमों के बारे में।

चैत्र नवरात्रि 2025: व्रत पारण कब होगा?

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च 2025 को हुई थी और इसका समापन 6 अप्रैल 2025 को महानवमी पर होगा। इस दिन नवमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।

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नवमी तिथि का समय

5 अप्रैल 2025 को रात 7:26 बजे से नवमी तिथि शुरू होगी।

6 अप्रैल 2025 को रात 7:22 बजे नवमी तिथि समाप्त हो जाएगी।

इसलिए, व्रत पारण का सही समय 6 अप्रैल 2025, रात 7:22 बजे के बाद होगा।

व्रत पारण के पहले क्या करें?

व्रत खोलने से पहले आपको कुछ महत्वपूर्ण कार्य करना चाहिए, ताकि व्रत का फल सही से प्राप्त हो सके:

कन्या पूजन: नवमी के दिन, कम से कम 9 कन्याओं को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें। इन कन्याओं को हलवा, पूड़ी, खीर और चना का भोजन दें और उन्हें दक्षिणा और उपहार दें। इस दिन कन्या पूजन करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे बिना किए व्रत का पुण्य नहीं मिलता।

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हवन: कन्या पूजन के बाद घर में हवन करें। इससे वातावरण में शुद्धता आती है और व्रत का फल दोगुना होता है।

कैसे करें नवरात्रि व्रत पारण?

पूजा: नवमी के दिन सबसे पहले मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा करें।

भोग लगाएं: मां को महाप्रसाद (हलवा, पूड़ी, खीर, आदि) अर्पित करें।

कन्या पूजन और हवन: कन्याओं को भोजन कराने के बाद उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। फिर घर में हवन करें।

व्रत खोलना: नवमी की तिथि के समापन के बाद, मां दुर्गा को अर्पित महाप्रसाद से व्रत खोलना सबसे उपयुक्त रहता है।

इन बातों का रखें ध्यान

नवमी तिथि के समापन के बाद ही व्रत पारण करें: व्रत पारण नवमी तिथि की समाप्ति के बाद ही करना चाहिए, यानी रात 7:22 बजे के बाद।

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सात्विक भोजन करें: व्रत पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करें। सीधे नमक का सेवन न करें। हलवा और मालपुआ खाना उचित रहेगा। इसके बाद आप पूड़ी और सब्जी भी खा सकते हैं।

कन्या पूजन का समय: कन्या पूजन सुबह या दोपहर तक कर लेना चाहिए। अगर आप इसे दिन के अंत तक करते हैं, तो कुछ लोग इसे असमय मान सकते हैं।

ज्वारे का विसर्जन: अगर आपने कलश स्थापना के दिन ज्वारे बोए थे, तो उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।

चैत्र नवरात्रि का व्रत पारण बहुत ही खास होता है, और अगर आप इसे सही विधि से करते हैं, तो न केवल आपको पुण्य मिलेगा बल्कि आपकी हर मनोकामना भी पूरी हो सकती है। इस दिन हर कार्य को श्रद्धा और सच्चे मन से करना चाहिए, ताकि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके।
 
 

 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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