चैत्र नवरात्रि 2025: आज मां कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा, जानें विधि, मंत्र और व्रत नियम

punjabkesari.in Wednesday, Apr 02, 2025 - 06:41 PM (IST)

नारी डेस्क: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन विशेष रूप से मां कूष्मांडा के पूजन के लिए समर्पित है। इन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता देवी माना जाता है। कहा जाता है कि जब पूरे ब्रह्मांड का अस्तित्व नहीं था, तो मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की। उनकी पूजा से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन को लेकर हम आपको मां कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, और व्रत के नियमों के बारे में बताएंगे।

मां कूष्मांडा की महिमा

मां कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली देवी हैं, जिनके हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला होती है। यह देवी सिंह पर सवार रहती हैं और इन्हें आदिशक्ति का चौथा रूप माना जाता है।

PunjabKesari

विशेष रूप से माना जाता है कि

जो भी भक्त सच्चे मन से मां कूष्मांडा की पूजा करता है, उसके जीवन से सभी प्रकार के भय और रोग समाप्त हो जाते हैं। उन्हें उपासना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि

स्नान और संकल्प

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। व्रत का संकल्प दिल से करें और मानसिक शुद्धता बनाए रखें।

ये भी पढ़ें: नवरात्रि में करें कमलगट्टे का चमत्कारी टोटका, बढ़ेगी दौलत और शोहरत

मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

पूजा स्थल को साफ करके वहां मां कूष्मांडा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

PunjabKesari

पूजन सामग्री अर्पित करें

मां को लाल फूल, रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करें।

विशेष भोग

मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

आरती और मंत्र का जाप

धूप-दीप जलाकर मां की आरती करें और "सर्वमंगल मांगल्ये" मंत्र का जाप करें।

हवन और प्रसाद वितरण

यदि संभव हो तो हवन भी करें और उसका प्रसाद सभी को वितरित करें।

PunjabKesari

मां कूष्मांडा के मंत्र

"सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥"

बीज मंत्र

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः॥"

स्तुति मंत्र

"या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

व्रत नियम

सात्विक भोजन: व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और अन्न का त्याग करना उत्तम माना जाता है।

मंत्र जाप: पूरे दिन मां के मंत्रों का जाप करें और उनकी कथा सुनें या पढ़ें।

मन की शुद्धता: क्रोध, द्वेष, लोभ से दूर रहें और अपने मन को शुद्ध रखें।

संध्या आरती: संध्या समय में मां की आरती और मंत्रों का जाप करें।

व्रत का पारण: व्रत खोलते समय फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।

मां कूष्मांडा की कृपा के लाभ

रोगों और कष्टों का नाश: मां कूष्मांडा की कृपा से सभी प्रकार के रोग, दुख, और शारीरिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं।

PunjabKesari

आर्थिक समृद्धि: पूजा करने से आर्थिक समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।

आध्यात्मिक उन्नति: मां की उपासना से व्यक्ति का मन शांत होता है और उसकी आध्यात्मिक उन्नति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा: जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो आत्मबल में वृद्धि करता है।

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए बहुत खास है। सही विधि से पूजा करने से न केवल व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। इस नवरात्रि में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मां कूष्मांडा की पूजा करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को और भी मंगलमय बनाएं।

यह पूजा विधि और नियमों का पालन करके न केवल आप मां कूष्मांडा के आशीर्वाद को प्राप्त करेंगे, बल्कि आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होगा।
 
 

 

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static