मरे हुए इंसान की निंदा क्यों नहीं करनी चाहिए, शास्त्रों में क्या कहा गया है
punjabkesari.in Saturday, Jan 03, 2026 - 05:49 PM (IST)
नारी डेस्क: किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी बुराई करना या मजाक उड़ाना न केवल असभ्य माना जाता है, बल्कि शास्त्रों में इसे गंभीर अपराध भी बताया गया है। भले ही वह व्यक्ति अपने जीवन में हमारे लिए परेशानी या दुख का कारण रहा हो, उसकी मृत्यु के बाद उसकी निंदा करना अनुचित और नकारात्मक माना जाता है।
मृत व्यक्ति की बुराई करने से क्या होता है?
शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद भी हमारे और उस व्यक्ति के बीच कार्मिक और भावनात्मक संबंध बना रहता है। अगर हम उनकी बुराई करते हैं या उनका मजाक उड़ाते हैं, तो हमारी ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है और हमारी हीलिंग या मानसिक शांति बाधित होती है।इसलिए मृत व्यक्ति के बारे में बात करते समय या तो कुछ न कहें या केवल अच्छी यादों को याद करें।
मनुस्मृति और महाभारत में उदाहरण
मनुस्मृति: किसी की निंदा करना घोर अपराध है। खासकर किसी मृत व्यक्ति का मजाक उड़ाना पाप माना गया है और इसे गंभीर नतीजे से जोड़ा गया है।
महाभारत, शांति पर्व: युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से यही शिक्षा ली कि मृत व्यक्ति का अपमान कभी नहीं करना चाहिए।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि शास्त्र हमें सिखाते हैं कि मृतक के प्रति सम्मान रखना चाहिए।
क्यों निंदा करना गलत है?
मरने के बाद व्यक्ति खुद अपनी बात नहीं रख सकता – उसकी बुराई करने से आप केवल अपनी नकारात्मकता दिखाते हैं।
जीवित पर प्रभाव – मृतक के परिवार और करीबी लोग अभी भी जीवित हैं। आपकी निंदा उनके लिए दुख और दर्द का कारण बन सकती है।
अधूरी सच्चाई – हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। केवल बुराई को याद करना गलत निष्कर्ष है।
धार्मिक दृष्टिकोण – प्रत्येक धर्म में यह विश्वास है कि मृत व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर चला जाता है। उनकी निंदा करना अनावश्यक और अनुचित है।
मरने के बाद किसी की बुराई करना न केवल शारीरिक और मानसिक शांति को प्रभावित करता है, बल्कि यह आपके नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी हानिकारक है। शास्त्र स्पष्ट रूप से कहते हैं कि मृतक का सम्मान करना चाहिए, और उसके बारे में केवल अच्छी या यादगार बातें ही याद रखनी चाहिए।
संक्षेप में, मृतक के प्रति सम्मान, सहानुभूति और शांति बनाए रखना ही सबसे सही तरीका है।

