रश्मिका-विजय की शादी में दिखी सोने की पट्टी, क्या है ‘तलयतोट्टम’ की परंपरा?
punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 01:24 PM (IST)
नारी डेस्क : कल यानी 26 फरवरी 2026 को रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा शादी के बंधन में बंध गए। कपल ने अपनी वेडिंग फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर कीं, जिनमें उनका पारंपरिक अंदाज़ फैंस का दिल जीत रहा है। लेकिन इन तस्वीरों में एक चीज़ ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा दोनों के माथे पर बंधी चमकती सोने की पट्टी। आखिर यह पट्टी क्यों पहनी जाती है और इसका क्या धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व है? आइए जानते हैं।
तलयतोट्टम क्या है?
तलयतोट्टम (Talaiyottam) एक पतली सोने की पट्टी या बैंड होती है, जिसे दुल्हन (और कई परंपराओं में दूल्हा भी) माथे पर बांधता है। यह आमतौर पर भौंहों के ऊपर, माथे के बीच में लगाई जाती है। तमिल, तेलुगु और कन्नड़ शादियों में यह आभूषण बेहद प्रचलित है और इसे सिर्फ गहना नहीं बल्कि शुभ प्रतीक माना जाता है।

तलयतोट्टम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक: दक्षिण भारतीय परंपरा में सोना अत्यंत पवित्र माना जाता है।
बुरी नज़र से रक्षा: मान्यता है कि यह दुल्हन-दूल्हे को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।
लक्ष्मी स्वरूप की भावना: विवाह के समय दुल्हन को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और सोने की पट्टी उनकी दिव्यता को दर्शाती है।
पीढ़ियों से चली परंपरा: कई परिवारों में यह पट्टी विरासत में दी जाती है।

रश्मिका-विजय की शादी में तलयतोट्टम
रश्मिका और विजय की शादी दो परंपराओं में हुई सुबह तेलुगु रीति-रिवाज से बाद में कोडावा परंपरा से तेलुगु विवाह में रश्मिका ने लाल साड़ी, भारी पारंपरिक गहने और माथे पर तलयतोट्टम पहना, जिससे उनका लुक बिल्कुल राजकुमारी जैसा लग रहा था। विजय भी पारंपरिक वेशभूषा में बेहद प्रभावशाली दिखे। इस पट्टी ने उनकी शादी को और अधिक संस्कृति-समृद्ध और शाही बना दिया।

आज भी क्यों है तलयतोट्टम प्रासंगिक?
भले ही शादी का फैशन बदल रहा हो, लेकिन दक्षिण भारतीय शादियों में परंपराओं की जड़ें आज भी मज़बूत हैं। जब रश्मिका जैसी बड़ी स्टार इसे पहनती हैं, तो यह परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचती है। यही वजह है कि तलयतोट्टम आज भी बड़ी से बड़ी शादियों में देखा जाता है।

