क्या बार-बार घबराहट होना Anxiety का संकेत ? जान लें इसके क्या-क्या होते हैं लक्षण
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 12:20 PM (IST)
नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कभी काम का दबाव, कभी रिश्तों की उलझन और कभी भविष्य की चिंता इंसान को मानसिक रूप से इतना थका देती है कि उसका असर सीधे शरीर पर दिखाई देने लगता है। कई लोग अचानक दिल की धड़कन तेज होने, सांस फूलने या बेचैनी बढ़ने जैसी समस्याओं को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये एंग्जाइटी यानी चिंता विकार के संकेत भी हो सकते हैं।
आखिर क्या होती है एंग्जाइटी?
एंग्जाइटी केवल ज्यादा सोचने या तनाव लेने का नाम नहीं है। यह मन की ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति खुद को किसी खतरे या दबाव में महसूस करता है। यह खतरा वास्तविक भी हो सकता है और केवल मन में पैदा हुआ डर भी। जब इंसान लगातार चिंता में रहता है तो शरीर अलर्ट मोड में चला जाता है। इस दौरान शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन जैसे एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल तेजी से बनने लगते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के बदलाव महसूस होने लगते हैं।

दिल की धड़कन तेज होना और सीने में जकड़न
एंग्जाइटी का सबसे सामान्य लक्षण दिल की धड़कनों का अचानक तेज हो जाना है। कई बार व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे दिल बहुत तेजी से धड़क रहा हो या सीने पर भारीपन आ गया हो। कुछ लोगों को छाती में हल्का दर्द या दबाव भी महसूस हो सकता है। अक्सर यह स्थिति बिना किसी शारीरिक बीमारी के भी हो सकती है, लेकिन लगातार ऐसा होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सांस लेने में परेशानी और घुटन महसूस होना
जब चिंता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो सांसों की गति भी प्रभावित होने लगती है। व्यक्ति को लगता है कि वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहा या उसकी सांसें बहुत तेज चल रही हैं। कई बार घुटन, बेचैनी और चक्कर आने जैसी समस्या भी होने लगती है। लगातार तनाव में रहने से शरीर जल्दी थकने लगता है और व्यक्ति खुद को कमजोर महसूस कर सकता है।
पेट और पाचन तंत्र पर भी पड़ता है असर
एंग्जाइटी का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पेट और आंतों पर भी पड़ता है। ज्यादा चिंता करने पर पाचन क्रिया धीमी हो सकती है। ऐसे में पेट फूलना, गैस बनना, मतली महसूस होना या बार-बार टॉयलेट जाने जैसी परेशानियां शुरू हो सकती हैं। कई लोग तनाव के दौरान भूख कम लगने या अचानक ज्यादा खाने की आदत का भी सामना करते हैं।

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शरीर की मांसपेशियों में अकड़न और दर्द
लगातार डर और चिंता की स्थिति में शरीर खुद को किसी खतरे के लिए तैयार करने लगता है। इसकी वजह से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें तनाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि एंग्जाइटी से जूझ रहे लोगों को गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द या अकड़न महसूस हो सकती है। कई बार सिरदर्द और शरीर में भारीपन भी बना रहता है।
हर छोटी बात पर डर और बेचैनी
एंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर हर छोटी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है। मन में नकारात्मक विचार आते रहते हैं और बिना किसी स्पष्ट कारण के डर महसूस होता है। कई बार व्यक्ति लोगों से दूरी बनाने लगता है और अकेले रहना पसंद करता है। इसका असर उसकी नींद, काम और रिश्तों पर भी पड़ने लगता है।
कब जरूरी हो जाती है डॉक्टर की सलाह?
अगर घबराहट, बेचैनी, तेज धड़कन या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। सही समय पर मदद मिलने से एंग्जाइटी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

एंग्जाइटी से राहत पाने के आसान तरीके मानसिक तनाव को कम करने के लिए नियमित व्यायाम, योग और मेडिटेशन काफी फायदेमंद माने जाते हैं। पर्याप्त नींद लेना, संतुलित भोजन करना और जरूरत से ज्यादा सोचने से बचना भी जरूरी है। इसके अलावा परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करना मानसिक दबाव को कम करने में मदद कर सकता है।

