क्या है हंता वायरस, जिसने ली 3 लोगों की जान? ऐसे पहचानें इसके लक्षण
punjabkesari.in Tuesday, May 05, 2026 - 02:11 PM (IST)
नारी डेस्क: हाल ही में अर्जेंटीना से दक्षिण अफ्रीका जा रहे क्रूज जहाज MV Hondius पर एक खतरनाक संक्रमण फैलने की खबर सामने आई है। इसमें 3 यात्रियों की मौत हो गई, जिससे हेल्थ एजेंसियां और विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह संक्रमण Hanta virus से जुड़ा हो सकता है, जिसने एक बार फिर इस वायरस को चर्चा में ला दिया है। ऐसे में इस वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं इससे खुद को कैसे बचाया जा सकता है सब कुछ बताएंगे हमारे इस आर्टिकल में ....
आखिर क्या है हंता वायरस कैसे फैलता है
हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि यह वायरसों का एक समूह है जो मुख्य रूप से चूहों के जरिए फैलता है। यह इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह सीधे फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण बढ़ने पर मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगती है। यह वायरस आमतौर पर चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। जब ये सूख जाते हैं, तो इनके कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। संक्रमित सतह को छूकर हाथों से मुंह या नाक को छूना भी संक्रमण का कारण बन सकता है।

क्या यह इंसान से इंसान में फैलता है
अच्छी बात यह है कि हंता वायरस सामान्य तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से चूहों के संपर्क में आने से ही फैलता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में दक्षिण अमेरिका में इसका इंसान से इंसान में फैलाव देखा गया है, लेकिन वर्तमान मामलों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है।शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, जिससे कई बार लोग भ्रमित हो जाते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी और पेट दर्द शामिल हैं। यही वजह है कि शुरुआती पहचान मुश्किल हो जाती है।
ये भी पढ़ें: सांस फूलना और नाक से सीटी की आवाज को न करें इग्नोर,हो सकते हैं बीमारी के संकेत
गंभीर स्थिति में क्या होता है
अगर संक्रमण बढ़ जाए तो मरीज को हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) हो सकता है। इसमें फेफड़ों में तरल भर जाता है, सांस लेना बेहद मुश्किल हो जाता है और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर सकता है। कुछ मामलों में किडनी भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल इस वायरस का कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज पूरी तरह सपोर्टिव केयर पर निर्भर करता है, जिसमें ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। जल्दी इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। इस वायरस से बचाव का सबसे अच्छा तरीका साफ-सफाई है। घर में चूहों को आने से रोकना, खाने-पीने की चीजों को ढककर रखना और गंदगी से बचना जरूरी है। अगर किसी जगह पर चूहों का मल साफ करना हो तो मास्क और दस्ताने जरूर पहनें और ब्लीच या कीटाणुनाशक का इस्तेमाल करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करें
अगर किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क में आने के बाद बुखार, शरीर में दर्द और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस फैलता जरूर है लेकिन सीमित परिस्थितियों में। साफ-सफाई, सतर्कता और सही जानकारी से इस खतरनाक संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है।

