मरने के बाद भी इंसान देख और सुन सकता है? रिसर्च में बड़ा खुलासा

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 11:28 AM (IST)

नारी डेस्क:  मौत को लेकर लोगों के मन में हमेशा एक बड़ा सवाल रहता है क्या दिल की धड़कन रुकते ही सब कुछ खत्म हो जाता है? या फिर कुछ समय तक चेतना (Consciousness) बनी रहती है? एक नई मेडिकल स्टडी ने इस रहस्य पर नई बहस छेड़ दी है। रिसर्च के अनुसार, कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट के बाद भी दिमाग में गतिविधि देखी गई।

क्लिनिकली डेड का मतलब क्या है?

जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है और सांस रुक जाती है, तो उसे कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को मेडिकल तौर पर “क्लिनिकली डेड” घोषित किया जाता है। आम धारणा यह है कि अगर 10 मिनट तक दिमाग को ऑक्सीजन न मिले तो स्थायी नुकसान हो जाता है। लेकिन नई स्टडी इस सोच को चुनौती देती है।

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यह रिसर्च किसने की?

यह स्टडी डॉ. सैम पारनिया और उनकी टीम ने की, जो NYU Langone Medical Center से जुड़े हैं। रिसर्च अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में की गई। इसमें कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों को शामिल किया गया। यह स्टडी मेडिकल जर्नल Resuscitation में प्रकाशित हुई।

EEG रिपोर्ट में क्या मिला?

मरीजों के दिमाग की गतिविधि को EEG (Electroencephalogram) मशीन से रिकॉर्ड किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि दिल की धड़कन रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक भी दिमाग में एक्टिविटी देखी गई। Gamma, Alpha, Beta, Theta और Delta ब्रेन वेव्स सक्रिय थीं। ये वही वेव्स हैं जो सोचने, याददाश्त और जागरूकता से जुड़ी होती हैं। यह खोज इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि दिल रुकने के तुरंत बाद दिमाग काम करना बंद कर देता है।

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मरीजों ने क्या अनुभव बताया?

करीब 40% मरीजों ने कहा कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट के दौरान भी “होश जैसा एहसास” हो रहा था। कुछ मरीजों ने बताया उन्हें लगा कि वे अपने शरीर से बाहर निकल गए हैं। वे डॉक्टरों को CPR करते हुए देख और सुन पा रहे थे। उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वे पूरी तरह जागरूक हैं। कुछ ने उस समय की साफ यादें भी साझा कीं। मरीजों का कहना था कि यह सपना या भ्रम नहीं था, बल्कि एक वास्तविक अनुभव जैसा लगा।

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क्या ऑक्सीजन की कमी से दिमाग अलग तरह से काम करता है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो उसका “ब्रेक सिस्टम” हट सकता है। इसे मेडिकल भाषा में “डिसइनहिबिशन” कहा जाता है।

इस स्थिति में व्यक्ति

अपनी जिंदगी की यादों को तेज़ी से देख सकता है। अपने फैसलों और भावनाओं को गहराई से महसूस कर सकता है। nखुद को बिना डर के आंक सकता है। कुछ लोग इसे “Near Death Experience” यानी मौत के करीब का अनुभव मानते हैं।

क्या यह साबित करता है कि मौत के बाद भी चेतना रहती है?

यह स्टडी किसी धार्मिक विश्वास को साबित नहीं करती। लेकिन यह जरूर दिखाती है कि मौत की प्रक्रिया उतनी सरल और तुरंत खत्म होने वाली नहीं हो सकती, जितना पहले माना जाता था। वैज्ञानिकों के अनुसार, चेतना और दिमाग के संबंध को लेकर अभी भी बहुत कुछ समझना बाकी है। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों में ऐसे अनुभव काफी हद तक एक जैसे पाए गए।

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यह रिसर्च मौत को लेकर हमारी पारंपरिक सोच पर सवाल उठाती है। दिल रुकने के बाद भी कुछ समय तक दिमाग सक्रिय रह सकता है—यह खोज मेडिकल साइंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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