व्यक्ति पर ‘माता’ क्यों आती है? धार्मिक आस्था और विज्ञान क्या कहते हैं

punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 10:18 AM (IST)

नारी डेस्क: अक्सर आपने मंदिरों, जागरणों या माता की चौकी में देखा होगा कि कोई व्यक्ति अचानक झूमने लगता है, तेज आवाज में बोलने लगता है या कहता है कि उस पर ‘माता’ आ गई है। उस समय उसका व्यवहार बिल्कुल अलग होता है और उसे अपने आसपास की चीज़ों की सुध-बुध नहीं रहती। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है आखिर व्यक्ति पर ‘माता’ क्यों आती है? क्या यह सिर्फ आस्था का मामला है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है?
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

धार्मिक दृष्टिकोण से माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा और भक्ति में डूब जाता है, तो उस पर देवी-देवताओं की कृपा होती है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति खुद को ईश्वर को समर्पित कर देता है और माना जाता है कि देवी शक्ति उसके शरीर में प्रवेश कर जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस दौरान व्यक्ति साधारण इंसान नहीं रहता, बल्कि माता रानी का माध्यम बन जाता है। कई लोग यह भी मानते हैं कि ‘माता’ आने पर व्यक्ति भविष्य की बातें बता सकता है या किसी की परेशानी का समाधान कर सकता है। इसलिए समाज में ऐसे लोगों को विशेष सम्मान भी दिया जाता है।

वैज्ञानिक नजरिए से क्या है सच्चाई?

विज्ञान और मनोविज्ञान इस घटना को अलग तरीके से देखता है। कई मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक तरह की मानसिक या भावनात्मक स्थिति हो सकती है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक भजन, संगीत, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक माहौल में रहता है, तो उसका दिमाग अलग अवस्था में चला जाता है। इसे ट्रांस स्टेट (Trance State) कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अपनी सामान्य चेतना खो देता है। कुछ विशेषज्ञ इसे सम्मोहन (Hypnosis), भ्रम (Delusion) या मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्थितियों से भी जोड़ते हैं। इस अवस्था में व्यक्ति जो करता या बोलता है, वह उसके अवचेतन मन (Subconscious Mind) से निकलता है, न कि किसी बाहरी शक्ति से। तेज आवाज़ें, भीड़, भावनात्मक माहौल और गहरी आस्था ये सभी मिलकर दिमाग पर असर डालते हैं।

आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी

यह कहना गलत होगा कि जो लोग ‘माता’ आने की बात मानते हैं, वे गलत हैं, या जो इसे वैज्ञानिक नजरिए से देखते हैं, वही सही हैं। भारत जैसे देश में आस्था और विज्ञान दोनों साथ-साथ चलते हैं। कुछ लोगों के लिए यह गहरा आध्यात्मिक अनुभव होता है, तो कुछ के लिए यह मानसिक प्रक्रिया। ज़रूरी यह है कि अगर किसी व्यक्ति की यह स्थिति बार-बार हो, या उससे उसकी सेहत और रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही हो, तो डॉक्टर या मानसिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर ली जाए।

‘माता’ आना एक ऐसा विषय है जो आस्था, परंपरा और विज्ञान तीनों से जुड़ा है। कोई इसे देवी शक्ति का चमत्कार मानता है, तो कोई मन की अवस्था। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि हर व्यक्ति की भावना और विश्वास का सम्मान किया जाए, लेकिन साथ ही स्वास्थ्य को भी नज़रअंदाज़ न किया जाए।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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