शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? जानें इसके पीछे की परंपरा

punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 01:59 PM (IST)

नारी डेस्क : इस साल शीतला अष्टमी (बसौड़ा) 11 मार्च को मनाई जाएगी। यह पर्व होली के लगभग आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। खासतौर पर बच्चों की अच्छी सेहत और परिवार की सुरक्षा के लिए यह व्रत बहुत शुभ माना जाता है। कई जगहों पर इस पर्व को बसौड़ा या बसियौरा भी कहा जाता है।

शीतला माता की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। पुराने समय में जब चेचक जैसी बीमारियां अधिक फैलती थीं, तब लोग माता शीतला की पूजा कर उनसे बचाव की प्रार्थना करते थे। ऐसा विश्वास है कि माता शीतला अपने भक्तों को बीमारियों से बचाती हैं और घर में सुख-शांति बनाए रखती हैं। यही कारण है कि इस दिन लोग पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की पूजा करते हैं।

इस दिन क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा

शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन प्रिय होता है, इसलिए इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और चूल्हा भी नहीं जलाया जाता। लोग एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन ही पूड़ी, पुआ, हलवा, चना, दही और अन्य पकवान बनाकर रख लेते हैं। अष्टमी के दिन सुबह सबसे पहले यही ठंडा भोजन माता शीतला को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इसके बाद पूरा परिवार उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अगर चूल्हा जलाया जाए या ताजा भोजन बनाया जाए तो माता शीतला नाराज हो सकती हैं, इसलिए लोग इस परंपरा का श्रद्धा से पालन करते हैं।

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ठंडा भोजन चढ़ाने की परंपरा

शीतला अष्टमी पर माता को ठंडे भोजन का भोग लगाने की विशेष परंपरा है। कई स्थानों पर इसे “बसौड़ा” या “बासी भोजन” भी कहा जाता है। इस दिन पूड़ी, पुआ, खीर, दही, चना और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। भोग अर्पित करने के बाद महिलाएं माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

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परंपरा के साथ जुड़ा स्वास्थ्य संदेश

शीतला अष्टमी के पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक स्वास्थ्य से जुड़ा संदेश भी माना जाता है। पुराने समय में जब गर्मी का मौसम शुरू होता था, तब लोग एक दिन आग से दूरी रखते थे और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते थे। ऐसा माना जाता है कि माता शीतला की पूजा करने से बीमारियों से बचाव होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए यह पर्व आस्था, परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।


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Monika

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