पैरों की झनझनाहट या ठंड का नहीं हो रहा एहसास? तो आपकी Nerves में है गड़बड़ी

punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 06:04 PM (IST)

नारी डेस्क: नई रिसर्च में पाया गया है कि त्वचा की तापमान-संवेदनशील नर्व सेल्स ठंड और गर्मी दोनों को महसूस कर सकती हैं। इसने उस आम धारणा को चुनौती दी है जिसके अनुसार त्वचा अलग-अलग तापमान का पता लगाने के लिए अलग-अलग नर्व सेल्स पर निर्भर करती है। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ़ क्वींसलैंड के क्वींसलैंड ब्रेन इंस्टीट्यूट की लेखिका क्लेरिसा व्हिटमायर ने कहा कि खास नर्व सेल्स - जिन्हें थर्मोरिसेप्टर्स कहा जाता है - इंसानों के जीवित रहने के लिए बहुत जरूरी हैं। ये दिमाग तक यह जानकारी पहुंचाते हैं कि शरीर की सतह पर क्या हो रहा है।  शरीर के थर्मोरिसेप्टर्स के बारे में नई जानकारी से उन लोगों के इलाज में मदद मिल सकती है जो थर्मल डिसफंक्शन (तापमान महसूस करने या नियंत्रित करने में दिक्कत) से जूझ रहे हैं। 
 

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व्हिटमायर ने कहा- "हमारी स्टडी से पता चलता है कि गर्मी और ठंड को महसूस करने के लिए दो अलग-अलग नर्व सेल्स पर निर्भर रहने के बजाय, शरीर के थर्मोरिसेप्टर्स दोनों तरह की संवेदनाओं का संकेत दिमाग को भेज सकते हैं - ठंडे हालात में गतिविधि बढ़ जाती है और तापमान बढ़ने पर कम हो जाती है।" लेखिका ने कहा कि 'न्यूरॉन' जर्नल में छपी ये बातें यह समझने में मदद कर सकती हैं कि उम्र बढ़ने और बीमारी से शरीर के थर्मोरिसेप्टर्स कैसे प्रभावित हो सकते हैं। चूहों पर की गई स्टडी में, रिसर्चर्स ने देखा कि हज़ारों थर्मोरिसेप्टर सेल्स ठंडे और गर्म तापमान पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। यह स्टडी रोज़मर्रा के सामान्य, दर्द न देने वाले तापमान पर केंद्रित थी, जैसे ठंडे कमरे में जाना या नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करना।
 

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लेखकों ने लिखा- "ज़्यादातर थर्मोरिसेप्टर्स ठंडे तापमान पर सक्रिय होते हैं और गर्म तापमान पर उनकी गतिविधि कम हो जाती है।" शरीर के थर्मोरिसेप्टर्स के बारे में नई जानकारी से उन लोगों के इलाज में मदद मिल सकती है जो थर्मल डिसफंक्शन (तापमान महसूस करने या नियंत्रित करने में दिक्कत) से जूझ रहे हैं। बोकिनिएक ने कहा- "इंसान अपने शरीर के अंदरूनी तापमान को बहुत बारीकी से नियंत्रित करते हैं, इसलिए तापमान का सही पता लगाना होमोस्टैसिस - यानी शरीर की अंदरूनी स्थिति को स्थिर बनाए रखने की क्षमता  के लिए बहुत ज़रूरी है।" लेखक ने कहा कि रीढ़ की हड्डी की चोट, मल्टीपल स्केलेरोसिस, डायबिटीज या पेरिफेरल न्यूरोपैथी से पीड़ित लोगों में थर्मल सेंसर्स प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उन्हें पर्यावरण के तापमान में बदलाव के अनुसार प्रतिक्रिया करने में मुश्किल हो सकती है। बोकिनिएक ने कहा, "उम्र बढ़ना भी एक बड़ी चिंता है - बुज़ुर्गों को हीटवेव और जलवायु परिवर्तन से खतरा होता है - और खराब थर्मल सेंसर्स इस बात का एक कारण हो सकते हैं कि उन्हें तापमान को नियंत्रित करने में मुश्किल क्यों होती है।"
 


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vasudha

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