Asthma के मरीज भूलकर भी न करें ये गलतियां, ये 6 चीजें बढ़ा सकती हैं आपकी परेशानी

punjabkesari.in Tuesday, Jul 07, 2026 - 12:18 PM (IST)

नारी डेस्क : अस्थमा (Asthma) एक ऐसी सांस संबंधी बीमारी है, जिसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि सही इलाज, नियमित दवाओं और कुछ जरूरी सावधानियों की मदद से इसे लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है। लेकिन अगर अस्थमा के ट्रिगर्स (Triggers) यानी वे चीजें जो बीमारी को बढ़ाती हैं, उनसे बचाव न किया जाए तो अचानक अस्थमा अटैक आने का खतरा बढ़ सकता है। धूल-मिट्टी, तेज खुशबू, धुआं, ठंडी हवा और कुछ एलर्जी पैदा करने वाली चीजें अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और कौन-सी आदतें अपनाने से अस्थमा को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

अस्थमा क्या है?

अस्थमा एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की सांस की नलियों (Airways) में सूजन आ जाती है और वे संकरी होने लगती हैं। इसकी वजह से सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, घरघराहट (Wheezing), बार-बार खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कई बार लक्षण इतने गंभीर हो सकते हैं कि तुरंत इलाज की जरूरत पड़ जाती है।

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धूल-मिट्टी अस्थमा की सबसे बड़ी दुश्मन

अगर आपको अस्थमा है तो धूल-मिट्टी से बचना बेहद जरूरी है। घर में जमा धूल, पुराने गद्दे, कालीन, पर्दे और तकियों में मौजूद डस्ट माइट्स (Dust Mites) कई लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं।

बचाव कैसे करें?
घर की नियमित सफाई करें।
बेडशीट, तकिए के कवर और कंबल को सप्ताह में कम से कम एक बार गर्म पानी से धोएं।
कालीन और भारी पर्दों की नियमित सफाई करें।
सफाई करते समय मास्क पहनें।
घर में धूल जमा न होने दें।

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तेज खुशबू और केमिकल्स से भी बढ़ सकती है परेशानी

रूम फ्रेशनर, परफ्यूम, अगरबत्ती, धूपबत्ती, पेंट, कीटनाशक स्प्रे और कुछ सफाई वाले केमिकल्स हवा में ऐसे कण छोड़ते हैं जो अस्थमा के मरीजों में सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
बचाव के लिए क्या करें: तेज खुशबू वाले उत्पादों का सीमित इस्तेमाल करें।
पेंटिंग या केमिकल वाले काम के दौरान कमरे में अच्छी वेंटिलेशन रखें।
अगर किसी खास खुशबू से दिक्कत होती है तो उससे पूरी तरह बचने की कोशिश करें।

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पालतू जानवरों के बाल भी बन सकते हैं ट्रिगर

कुत्ते, बिल्ली या अन्य पालतू जानवरों के बाल ही नहीं, बल्कि उनकी त्वचा के सूक्ष्म कण (Pet Dander) भी कुछ लोगों में एलर्जी और अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं।
अगर ऐसा हो तो एलर्जी की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
पालतू जानवरों को बेडरूम में न आने दें।
घर की नियमित सफाई करें।
HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है।

ठंडी और शुष्क हवा भी बन सकती है वजह

सर्द मौसम या बहुत ठंडी और सूखी हवा कुछ लोगों में सांस की नलियों को संकुचित कर सकती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है।
बचाव के उपाय: बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें।
बहुत ठंडी हवा में अधिक देर तक रहने से बचें।
मौसम बदलने के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं नियमित लें।

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धुआं और प्रदूषण से बनाएं दूरी

सिगरेट का धुआं, वाहन का प्रदूषण, लकड़ी या कोयले का धुआं और पटाखों का धुआं अस्थमा के सबसे सामान्य ट्रिगर्स में शामिल हैं। सेकेंड हैंड स्मोक (दूसरों की सिगरेट का धुआं) भी उतना ही नुकसानदायक हो सकता है।
बचाव के लिए करें ये काम: धूम्रपान से पूरी तरह बचें।
धूम्रपान करने वालों के आसपास ज्यादा देर न रहें।
प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलते समय मास्क पहनें।

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वायरल इंफेक्शन और मौसम में बदलाव

सर्दी-जुकाम, फ्लू और वायरल इंफेक्शन भी कई लोगों में अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। वहीं मौसम में अचानक बदलाव भी अस्थमा अटैक का कारण बन सकता है।
बचाव के तरीके : हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू वैक्सीन लगवाने पर विचार करें।

अस्थमा के मरीज क्या करें?

अपने ट्रिगर्स की पहचान करें और उनसे बचने की कोशिश करें।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर समय पर लें।
इनहेलर की सही तकनीक सीखें और नियमित फॉलो-अप कराएं।
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार।
संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं।
सांस लेने में परेशानी बढ़ने या बार-बार अटैक आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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इन बातों को याद रखें: अस्थमा का हर मरीज अलग होता है। किसी को धूल से परेशानी होती है तो किसी को ठंडी हवा, धुआं, परागकण (Pollen) या पालतू जानवरों से। इसलिए सबसे जरूरी है कि आप अपने ट्रिगर्स को पहचानें और उनसे बचाव करें। सही इलाज, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित सावधानियों के साथ अस्थमा के बावजूद सामान्य और सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।


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Content Editor

Monika

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