पति को है भूलने की बीमारी तो पत्नी भी आ सकती है इसकी चपेट में, यहां पढ़िए नई स्टडी
punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 05:26 PM (IST)
नारी डेस्क: लंबे समय तक साथ रहने वाले दंपतियों में केवल जीवनशैली ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी कई पहलू भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो जाते हैं। मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक के बाद अब एक नए अध्ययन में संकेत मिला है कि डिमेंशिया का जोखिम भी पति-पत्नी में साझा हो सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इसका यह अर्थ नहीं है कि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। ताइवान में लगभग 10 लाख विवाहित वयस्कों पर किए गए इस व्यापक अध्ययन में पाया गया कि यदि किसी व्यक्ति के जीवनसाथी को डिमेंशिया का पता चलता है, तो दूसरे साथी में भी इस बीमारी का निदान होने की संभावना उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है।
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इतने साल तक किया गया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने वर्ष 1998 से 2022 के बीच ताइवान की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े लोगों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। अध्ययन में ऐसे 1.90 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिनके जीवनसाथी में डिमेंशिया का नया मामला सामने आया था। उनकी तुलना 7.60 लाख से अधिक ऐसे लोगों से की गई, जिन्हें न तो स्वयं डिमेंशिया था और न ही उनके जीवनसाथी को यह बीमारी थी। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की अन्य बीमारियों, स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग और परिवार के आकार जैसे कारकों को भी विश्लेषण में शामिल किया। इसके बाद यह जांचा गया कि इन सभी समानताओं को ध्यान में रखने के बाद भी क्या एक जीवनसाथी को डिमेंशिया होने से दूसरे साथी का जोखिम बढ़ा रहता है।
जीवनसाथी को डिमेंशिया होने का कारण
अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं के जीवनसाथी को डिमेंशिया हुआ, उनमें इस बीमारी का सापेक्ष जोखिम 74 प्रतिशत अधिक पाया गया। पुरुषों के मामले में यह वृद्धि 69 प्रतिशत रही। शोधकर्ताओं ने हालांकि स्पष्ट किया कि सापेक्ष जोखिम केवल दो समूहों के बीच तुलना दर्शाता है, जबकि वास्तविक जोखिम को समझना भी जरूरी है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन निष्कर्षों का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि डिमेंशिया किसी संक्रमण की तरह एक साथी से दूसरे में पहुंचता है। इसके पीछे अधिक जटिल और दीर्घकालिक कारण हो सकते हैं। लोग अक्सर अपने जैसे शिक्षा स्तर, आय, जीवनशैली और मानसिक क्षमता वाले साथी का चयन करते हैं। इसे 'असॉर्टेटिव मैटिंग' कहा जाता है। इसके बाद वर्षों तक साथ रहने के दौरान दंपति एक ही वातावरण में रहते हैं, समान भोजन करते हैं, समान वायु में सांस लेते हैं, समान स्तर की शारीरिक गतिविधि करते हैं और जीवन की कई समान परिस्थितियों का सामना करते हैं, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। यह अध्ययन यह निर्धारित करने के लिए तैयार नहीं किया गया था कि ऐसा क्यों होता है।
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डिमेंशिया के लक्षण
शोधकर्ताओं के अनुसार, अन्य अध्ययनों से यह संभावना सामने आई है कि डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करने वाले जीवनसाथी को लंबे समय तक तनाव, नींद में बाधा, सामाजिक अलगाव और शारीरिक गतिविधि तथा भोजन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह दिखाना है कि डिमेंशिया का जोखिम दंपतियों में एक साथ दिखाई देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अद्यतन दिशा-निर्देशों में नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, रक्तचाप नियंत्रण, धूम्रपान छोड़ना, आवश्यकता पड़ने पर श्रवण यंत्र का उपयोग तथा आजीवन सीखते रहने जैसी बातों पर बल दिया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अध्ययन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि डिमेंशिया किसी एक निर्णय या एक जोखिम कारक का परिणाम नहीं, बल्कि दशकों तक जी गई जीवनशैली और परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव है। इसलिए इसकी रोकथाम के उपाय भी दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ किए जाने चाहिए।

