30 की उम्र पार करते ही करा लें ये जरूरी टेस्ट, शरीर में छिपी बीमारी का पहले ही चलेगा पता

punjabkesari.in Sunday, Sep 27, 2026 - 05:22 PM (IST)

 नारी डेस्क:  उम्र 30 के पार पहुंचते ही जिंदगी की जिम्मेदारियां तो बढ़ती ही हैं, साथ में सेहत को लेकर भी थोड़ा ज्यादा सजग रहने की जरूरत होती है। कई बार शरीर में कोई बीमारी या स्वास्थ्य समस्या धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में कुछ सामान्य हेल्थ चेकअप से शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 30 साल की उम्र पूरी होते ही हर व्यक्ति को ढेर सारे टेस्ट कराने शुरू कर देने चाहिए। जांच की जरूरत उम्र के साथ-साथ वजन, परिवार में बीमारी का इतिहास, खान-पान, जीवनशैली और पहले की मेडिकल रिपोर्ट पर भी निर्भर करती है। इसलिए किसी भी टेस्ट को अपनी नियमित जांच में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।

ब्लड प्रेशर की जांच जरूर कराएं

हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर 'साइलेंट' समस्या कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में लंबे समय तक इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए सिर्फ सिरदर्द या चक्कर आने पर ही ब्लड प्रेशर चेक करवाना सही तरीका नहीं है। USPSTF के अनुसार 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए। अगर जांच में ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिलता है तो डॉक्टर दोबारा जांच या घर पर नियमित निगरानी की सलाह दे सकते हैं।

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कोलेस्ट्रॉल का भी रखें ध्यान

शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या नहीं, इसका पता सिर्फ लक्षणों से लगाना मुश्किल होता है। इसके लिए आमतौर पर खून की जांच यानी लिपिड प्रोफाइल की मदद ली जाती है। CDC के मुताबिक ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों में हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच की जा सकती है। हालांकि जिन लोगों को हृदय रोग, डायबिटीज है या परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर ज्यादा बार जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

ब्लड शुगर और HbA1c कब जरूरी?

ब्लड शुगर टेस्ट से उस समय शरीर में ग्लूकोज का स्तर पता चलता है, जबकि HbA1c पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर की जानकारी देता है। लेकिन 30 साल की उम्र में हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए डायबिटीज की स्क्रीनिंग जरूरी हो, ऐसा नहीं है। USPSTF बिना लक्षण वाले 35 से 70 साल के उन वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह देता है, जिनका वजन ज्यादा या मोटापा है। हालांकि परिवार में डायबिटीज का इतिहास, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर कम उम्र में भी जांच की सलाह दे सकते हैं।

वजन के साथ कमर का घेरा भी देखें

सिर्फ वजन देखकर पूरी सेहत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, लेकिन वजन और लंबाई से BMI का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा कमर का घेरा भी ध्यान देने वाली चीज है, क्योंकि पेट के आसपास जमा ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है। अगर 30 की उम्र के बाद वजन अचानक बढ़ने लगे, बिना कोशिश के तेजी से कम हो या शरीर में लगातार कोई असामान्य बदलाव महसूस हो रहा हो, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

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हर किसी को ECG या पूरे शरीर का स्कैन कराने की जरूरत नहीं

कई लोग उम्र 30 पार करते ही फुल बॉडी चेकअप के नाम पर कई तरह के महंगे टेस्ट करवाने लगते हैं। लेकिन बिना किसी लक्षण या खास जोखिम के हर व्यक्ति को ECG, पूरे शरीर का स्कैन या हर तरह की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। कौन-सा टेस्ट कब करवाना है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे स्वास्थ्य जोखिमों को देखकर तय किया जाता है। इसलिए खुद से टेस्ट की लंबी लिस्ट बनवाने के बजाय डॉक्टर से अपनी जरूरत के हिसाब से हेल्थ चेकअप के बारे में पूछना ज्यादा सही रहेगा।

30 की उम्र कोई ऐसी तय सीमा नहीं है, जहां पहुंचते ही हर व्यक्ति को एक जैसी मेडिकल जांच करवानी शुरू कर देनी चाहिए। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, वजन और जरूरी स्वास्थ्य संकेतों पर नजर रखना अच्छी आदत है, जबकि कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर या दूसरे टेस्ट व्यक्ति के जोखिम के अनुसार किए जा सकते हैं। समय पर जांच का मकसद सिर्फ बीमारी पकड़ना नहीं, बल्कि भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों को समझकर सही समय पर सावधानी बरतना भी है।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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