डायबिटीज और BP के मरीज करवा चौथ का व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

punjabkesari.in Sunday, Oct 25, 2026 - 04:37 PM (IST)

 नारी डेस्क:   करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक व्रत रखती हैं। कई महिलाएं इस दौरान न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी पीती हैं। लेकिन अगर आपको डायबिटीज यानी मधुमेह या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर कम होने का खतरा हो सकता है। वहीं, कुछ दवाओं के साथ पानी की कमी या भोजन छोड़ने से भी परेशानी बढ़ सकती है। हाई बीपी के मरीजों में भी डिहाइड्रेशन और दवाओं के असर के कारण चक्कर, कमजोरी या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि डायबिटीज और बीपी के मरीज करवा चौथ के दौरान किन बातों का ध्यान रखें।

व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें

अगर आपको डायबिटीज या हाई बीपी है, तो करवा चौथ का व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर बात करें। हर व्यक्ति की सेहत, दवाएं और बीमारी की गंभीरता अलग होती है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि जो व्रत किसी दूसरे व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, वह आपके लिए भी सही हो। डायबिटीज के मरीजों को खास तौर पर यह समझना चाहिए कि लंबे समय तक खाना न खाने से उनकी ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ सकता है। अगर आपकी शुगर अक्सर कम हो जाती है, डायबिटीज नियंत्रित नहीं रहती या आप इंसुलिन और ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे शुगर कम हो सकती है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत रखना जोखिम भरा हो सकता है।

PunjabKesari

सरगी में पौष्टिक और संतुलित भोजन करें

करवा चौथ पर सरगी का विशेष महत्व होता है। चूंकि इसके बाद लंबे समय तक भोजन नहीं किया जाता, इसलिए सरगी में केवल मिठाई या तली-भुनी चीजें खाने के बजाय पौष्टिक भोजन लेना बेहतर है। सरगी में दलिया, ओट्स, मल्टीग्रेन रोटी, दही, दूध, थोड़े सूखे मेवे और साबुत फल शामिल किए जा सकते हैं। भोजन में फाइबर, प्रोटीन और स्वस्थ वसा का संतुलन रखने से पेट देर तक भरा महसूस हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों को बहुत अधिक मीठी चीजें, मिठाइयां और मीठे पेय लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ध्यान रखें कि सरगी में ज्यादा खा लेना लंबे समय तक भूखे रहने के जोखिम को खत्म नहीं करता। सही भोजन के साथ अपनी दवाओं और ब्लड शुगर की निगरानी भी जरूरी है।

व्रत शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी पिएं

करवा चौथ में कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन पानी भी नहीं पीतीं। लेकिन डायबिटीज और बीपी के मरीजों के लिए पानी की कमी परेशानी बढ़ा सकती है। शरीर में पानी कम होने से कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। व्रत शुरू होने से पहले सामान्य रूप से पर्याप्त पानी पिएं। सरगी के दौरान बिना अतिरिक्त चीनी वाले पेय भी लिए जा सकते हैं, लेकिन किसी पेय को पानी का पूरा विकल्प न समझें। डायबिटीज के मरीज मीठे जूस और शरबत से बचें। अगर आपको किडनी या दिल की बीमारी है और डॉक्टर ने पानी पीने की मात्रा सीमित रखी है, तो उसी सलाह का पालन करें। यह भी समझना जरूरी है कि व्रत शुरू होने से पहले पानी पी लेने से पूरे दिन पानी न पीने का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।

दवाओं के समय में खुद से बदलाव न करें

डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों के लिए दवाएं नियमित समय पर लेना जरूरी होता है। व्रत के कारण भोजन और पानी का समय बदलने से कुछ दवाओं के सेवन के तरीके में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में डॉक्टर से पहले ही पूछ लें कि व्रत के दिन दवा कब और कैसे लेनी है। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें, खुराक कम-ज्यादा न करें और न ही उसका समय बदलें। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वाले मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अगर डॉक्टर को लगता है कि व्रत के दौरान दवाओं को सुरक्षित तरीके से लेना संभव नहीं है, तो सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।

ये भी पढ़ें:  करवा चौथ की पूजा में क्यों इस्तेमाल किया जाता है मिट्टी का करवा?

शरीर में दिखने वाले संकेतों को नजरअंदाज न करें

व्रत के दौरान अगर अचानक चक्कर आने लगें, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, ठंडा पसीना आए, हाथ कांपें, दिल की धड़कन तेज हो या धुंधला दिखाई देने लगे, तो इन लक्षणों को हल्के में न लें। डायबिटीज के मरीजों में ये कम ब्लड शुगर के संकेत हो सकते हैं। वहीं, पानी की कमी या ब्लड प्रेशर में बदलाव से भी कमजोरी और चक्कर आ सकते हैं। यदि संभव हो, तो ब्लड शुगर और बीपी की जांच करें। डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके से शुगर की निगरानी करनी चाहिए। अगर ब्लड शुगर कम हो जाए या हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखाई दें, तो व्रत जारी रखने के बजाय तुरंत उचित उपचार लें। गंभीर कमजोरी, बेहोशी, भ्रम या सीने में दर्द होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।

 भारी काम और ज्यादा मेहनत करने से बचें

व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में ज्यादा शारीरिक मेहनत करने, भारी व्यायाम करने या लंबे समय तक धूप में रहने से परेशानी बढ़ सकती है। डायबिटीज और बीपी के मरीजों को व्रत वाले दिन अपनी दिनचर्या थोड़ी हल्की रखनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा काम करने के बजाय आराम करें और गर्मी में बाहर निकलने से बचें। अगर कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हैं, तो खुद को काम करने के लिए मजबूर न करें।

PunjabKesari

चांद निकलने के बाद व्रत कैसे खोलें?

करवा चौथ पर चांद देखने के बाद व्रत खोला जाता है। लेकिन लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने के बाद एकदम से बहुत ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए। पहले थोड़ी मात्रा में पानी पिएं और फिर हल्का, संतुलित भोजन करें। डायबिटीज के मरीजों को व्रत खोलते समय मिठाई, मीठे पेय और बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन एक साथ लेने से बचना चाहिए। भोजन में सब्जियां, प्रोटीन और उचित मात्रा में अनाज शामिल किए जा सकते हैं। अपनी दवाओं और ब्लड शुगर की निगरानी डॉक्टर की सलाह के अनुसार जारी रखें।

क्या डायबिटीज और बीपी के मरीजों को निर्जला व्रत रखना चाहिए?

इसका जवाब हर व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों के लिए लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर जिनकी ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहती, जिन्हें बार-बार शुगर कम होने की समस्या होती है या जिन्हें दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

सबसे जरूरी बात: करवा चौथ आस्था और प्रेम का पर्व है, लेकिन अपनी सेहत को खतरे में डालना जरूरी नहीं। व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें और अगर निर्जला व्रत आपके लिए सुरक्षित नहीं है, तो अपनी सेहत के अनुसार दूसरा विकल्प चुनें।  


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static