किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए करवा चौथ का व्रत, जानें वजह
punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 12:55 PM (IST)
नारी डेस्क : करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि, पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहना हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता। खासकर गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं किन परिस्थितियों में निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं रखें सेहत का ध्यान
गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थों की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर, कमजोरी और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। अगर आप किसी धार्मिक परंपरा के कारण व्रत रखना चाहती हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें और सेहत को प्राथमिकता दें।

स्तनपान कराने वाली महिलाएं
जो महिलाएं छोटे बच्चों को स्तनपान कराती हैं, उनके लिए पर्याप्त पानी, कैलोरी और पोषक तत्व लेना जरूरी है। लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से मां को कमजोरी, सिरदर्द या डिहाइड्रेशन हो सकता है। खासकर यदि बच्चा नवजात है या मां की सेहत पहले से कमजोर है, तो निर्जला व्रत रखने से बचना बेहतर है। व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं
डायबिटीज में लंबे समय तक भोजन नहीं करने से ब्लड शुगर बहुत कम या ज्यादा हो सकती है। खासकर इंसुलिन या कुछ ऐसी दवाएं लेने वाली महिलाओं में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर कम होने का खतरा बढ़ सकता है। इसके कारण पसीना आना, कंपकंपी, चक्कर, कमजोरी और गंभीर स्थिति में बेहोशी भी हो सकती है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
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हाई या लो ब्लड प्रेशर की समस्या
हाई या लो ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रही महिलाओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए। शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। लो ब्लड प्रेशर होने पर चक्कर आने और बेहोशी का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर की मरीजों को अपनी दवाएं और डॉक्टर की सलाह नियमित रूप से फॉलो करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

एनीमिया या गंभीर बीमारी होने पर
जिन महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी, किडनी की बीमारी, हृदय रोग या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से परेशानी हो सकती है। एनीमिया में पहले से कमजोरी, थकान और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। निर्जला व्रत इन लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए अपनी बीमारी और चल रहे इलाज को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
6. पीरियड्स के दौरान व्रत रखने को लेकर क्या करें?
मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ और व्रत को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं। धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत रखना है या नहीं, यह व्यक्तिगत आस्था और परंपरा का विषय है। मेडिकल दृष्टि से पीरियड्स अपने आप में व्रत रखने पर रोक नहीं हैं, लेकिन यदि इस दौरान बहुत ज्यादा रक्तस्राव, तेज दर्द, चक्कर, कमजोरी या एनीमिया की समस्या हो, तो निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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व्रत के दौरान इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर व्रत के दौरान तेज चक्कर, बेहोशी, भ्रम, बहुत ज्यादा कमजोरी, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। जरूरत पड़ने पर व्रत तोड़कर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। गंभीर लक्षण होने पर आपातकालीन मदद लें।
नोट: करवा चौथ आस्था और परंपरा से जुड़ा त्योहार है, लेकिन सेहत को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। यदि आपको कोई बीमारी है, आप गर्भवती हैं या नियमित दवाएं लेती हैं, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

