बार-बार पैरों में सूजन को न करें Ignore , इन बीमारियों का हो सकता है संकेत
punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 11:52 AM (IST)
नारी डेस्क: दिनभर खड़े रहने, अधिक चलने या लंबे समय तक एक ही जगह बैठने के बाद पैरों में हल्की सूजन आ जाना आम बात हो सकती है। कई बार गलत फिटिंग वाले जूते पहनने या अधिक नमक खाने की वजह से भी यह समस्या दिखाई देती है। लेकिन अगर पैरों या टखनों में बार-बार सूजन आती है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ अन्य लक्षण भी महसूस होते हैं, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार होने वाली सूजन कई बार शरीर के अंदर मौजूद किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है। ऐसे में समय रहते कारण का पता लगाना और डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है।
क्या होती है एडिमा?
मेडिकल भाषा में पैरों की सूजन को एडिमा (Edema) कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति होती है, जब शरीर के ऊतकों में सामान्य से अधिक तरल पदार्थ जमा होने लगता है। आमतौर पर जब शरीर का रक्त संचार तंत्र या कोई महत्वपूर्ण अंग ठीक तरह से काम नहीं करता, तो अतिरिक्त तरल पदार्थ गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों और टखनों में इकट्ठा होने लगता है। यह केवल एक लक्षण है, बीमारी नहीं। इसलिए बार-बार एडिमा होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर के किसी अंग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

हृदय रोग भी हो सकता है वजह
पैरों में लगातार सूजन आने का एक प्रमुख कारण हृदय से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। जब हृदय शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाता, तो रक्त नसों में जमा होने लगता है। इससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है। अगर सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ, जल्दी थकान महसूस होना, सीने में दर्द या भारीपन जैसे लक्षण भी हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
किडनी की खराब कार्यक्षमता भी बढ़ा सकती है सूजन
किडनी का मुख्य काम शरीर से अतिरिक्त पानी, नमक और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना होता है। यदि किडनी ठीक तरह से काम नहीं कर रही हो, तो शरीर में पानी और सोडियम जमा होने लगता है। इसका असर सबसे पहले पैरों, टखनों और कई बार आंखों के नीचे सूजन के रूप में दिखाई देता है।यदि पैरों की सूजन के साथ पेशाब की मात्रा में कमी, बार-बार पेशाब आना या पेशाब के रंग में बदलाव जैसे लक्षण महसूस हों, तो किडनी की जांच कराना जरूरी हो सकता है।
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लिवर की बीमारी का भी हो सकता है संकेत
लिवर शरीर में एल्ब्यूमिन नामक एक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं के भीतर तरल पदार्थ को बनाए रखने में मदद करता है। जब लिवर सिरोसिस या किसी अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित होता है, तो एल्ब्यूमिन का स्तर कम होने लगता है। इससे तरल पदार्थ रक्त वाहिकाओं से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन आ सकती है। यदि लंबे समय तक सूजन बनी रहे और इसके साथ पेट फूलना, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना जैसे लक्षण भी हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

नसों में खून का थक्का भी हो सकता है कारण
कुछ मामलों में पैरों की सूजन का कारण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) भी हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यदि अचानक केवल एक पैर में तेज सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
किन लक्षणों के साथ तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर पैरों की सूजन के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द, पेशाब कम होना, केवल एक पैर में ज्यादा सूजन, तेज दर्द, त्वचा का लाल या गर्म होना, या सूजन लगातार कई दिनों तक बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर जांच से बीमारी का सही कारण पता लगाया जा सकता है और इलाज शुरू होने से गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव हो सकता है।
कब नहीं करें लापरवाही?
हर बार पैरों की सूजन किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन यदि यह बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या अन्य असामान्य लक्षणों के साथ दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। शरीर अक्सर शुरुआती लक्षणों के जरिए अंदरूनी समस्याओं का संकेत देता है। ऐसे में समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है। यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

