मुंह में दिखने वाले इन बदलावों को न करें Ignore, हो सकते हैं मुंह में कैंसर के संकेत

punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 09:53 AM (IST)

नारी डेस्क: मुंह का कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसके शुरुआती संकेत कई बार बहुत सामान्य लग सकते हैं। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बे, लगातार दर्द, निगलने में परेशानी या गर्दन में गांठ जैसे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते इन संकेतों की पहचान हो जाए तो बीमारी की जांच और इलाज जल्द शुरू किया जा सकता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, आइए जानते हैं ओरल कैंसर के कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं, इसकी जांच कैसे होती है और किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है।

क्या होता है ओरल कैंसर

मुंह के कैंसर को Oral Cancer, Oral Cavity Cancer या Mouth Cancer भी कहा जाता है। यह मुंह के किसी भी हिस्से से शुरू हो सकता है और आगे चलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। ओरल कैंसर सिर्फ जीभ तक सीमित नहीं होता। यह होंठ, मसूड़ों, दांतों, गाल के अंदरूनी हिस्से, मुंह के तल, मुंह की ऊपरी सतह, स्लाइवरी ग्लैंड्स, टॉन्सिल्स या उवुला जैसे हिस्सों में भी हो सकता है। यही वजह है कि मुंह के अंदर होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है।

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मुंह के कैंसर के शुरुआती चेतावनी संकेत क्या हैं

ओरल कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। फिर भी कुछ ऐसे बदलाव हैं, जिन्हें लंबे समय तक बने रहने पर गंभीरता से लेना चाहिए।

 ऐसा घाव जो ठीक न हो

मुंह, चेहरे या गले में कोई घाव हो गया है और वह सामान्य समय में ठीक नहीं हो रहा, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर ऐसा घाव जो लगातार बना रहे या बार-बार उसी जगह हो, उसकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

 मुंह खोलने में परेशानी

अगर पहले की तुलना में मुंह खोलने में दिक्कत होने लगे या जबड़े को हिलाने में परेशानी महसूस हो, तो यह भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है।

सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना

जीभ, मसूड़ों या मुंह के अंदर किसी हिस्से पर सफेद, लाल या दोनों रंगों के मिले-जुले धब्बे दिखाई देना भी ओरल कैंसर से जुड़े संभावित संकेतों में शामिल है।

गर्दन में गांठ या मोटापन

गर्दन में अचानक गांठ महसूस होना या किसी हिस्से में मांस का मोटा लगना भी ध्यान देने वाला बदलाव है। ऐसी गांठ के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, लेकिन लगातार बनी रहने पर इसकी जांच जरूरी है।

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लगातार दर्द रहना

मुंह, जीभ या जबड़े में लगातार दर्द बना रहना, खासकर जब इसका कोई साफ कारण नजर न आए, तो इसे सामान्य समझकर लंबे समय तक टालना ठीक नहीं है।

चबाने या निगलने में परेशानी

खाना चबाते समय परेशानी होना या निगलने में लंबे समय तक दिक्कत महसूस होना भी ओरल कैविटी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

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 मुंह या मसूड़ों में सूजन या मोटा दाना

मुंह के अंदर, होंठों के ऊपर या मसूड़ों में सूजन, उभार या मोटा दाना दिखाई देना भी डॉक्टर को दिखाना चाहिए, खासकर अगर यह ठीक न हो रहा हो।

इसके अलावा ये बदलाव भी हो सकते हैं

कुछ लोगों में आवाज में बदलाव, दांतों का बिना किसी स्पष्ट वजह के ढीला होना, मुंह से अचानक खून आना या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह जरूरी नहीं कि व्यक्ति को कैंसर ही है। ये ओरल कैविटी के किसी Benign Tumor या शरीर में होने वाली किसी दूसरी बीमारी या कैंसर से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। अगर इनमें से कोई लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।

कैसे होती है मुंह के कैंसर की जांच?

ओरल कैंसर की जांच के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज की Medical History समझते हैं। इसके बाद सामान्य शारीरिक जांच और मुंह की जांच की जाती है। ओरल एग्जामिनेशन के दौरान डॉक्टर मुंह के अलग-अलग हिस्सों को ध्यान से देखते हैं। सफेद या लाल पैच, सूजन, असामान्य उभार या किसी तरह की गांठ जैसी चीजों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर आगे कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। ब्रश साइटोलॉजी इस जांच में मुंह के जिस हिस्से पर संदेह होता है, वहां से कोशिकाओं का सैंपल लिया जाता है। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जाता है कि कोशिकाओं में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं है। फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी अगर किसी हिस्से में गांठ या सूजन दिखाई देती है, तो पतली सुई की मदद से वहां से कुछ कोशिकाएं निकाली जाती हैं। इन कोशिकाओं को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। बायोप्सी अगर डॉक्टर को किसी हिस्से में कैंसर का संदेह होता है, तो वहां से थोड़ा सा टिशू लेकर उसकी जांच की जा सकती है। Biopsy के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि टिशू में कैंसर वाली कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं। इमेजिंग टेस्ट कुछ मामलों में डॉक्टर बीमारी की स्थिति और उसके फैलाव को समझने के लिए इमेजिंग टेस्ट भी करा सकते हैं। इनमें X-ray, CT Scan, MRI और PET Scan शामिल हो सकते हैं। कौन-सा टेस्ट जरूरी है, यह मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

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किन लोगों में ओरल कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है?

कुछ आदतों और परिस्थितियों की वजह से ओरल कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। खासतौर पर तंबाकू का सेवन करने वालों को सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी रूप में Tobacco का सेवन करना। मुंह के अंदर तंबाकू रखकर इस्तेमाल करना। अधिक मात्रा में Alcohol का सेवन करना। दांतों का बहुत नुकीला होना या गलत आकार के डेंचर का इस्तेमाल करना, जिससे मुंह के अंदर बार-बार चोट या घर्षण हो। लंबे समय तक खराब या असंतुलित डाइट लेना। Human Papillomavirus (HPV) से संक्रमण।शरीर की Immunity कमजोर होना। सूरज की Ultraviolet (UV) Rays के ज्यादा संपर्क में रहना, जिससे खासतौर पर होंठों पर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए

मुंह में होने वाला हर घाव या हर सफेद-लाल धब्बा कैंसर नहीं होता। कई बार इसके पीछे संक्रमण, चोट या दूसरी सामान्य वजहें भी हो सकती हैं। लेकिन अगर मुंह में कोई असामान्य बदलाव लगातार बना हुआ है और दो हफ्ते में ठीक नहीं हो रहा, तो इसे टालना नहीं चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने और जरूरी जांच कराने से बीमारी की सही वजह का पता लगाया जा सकता है। ओरल कैंसर की स्थिति में भी शुरुआती स्तर पर पहचान होने से इलाज की दिशा तय करने में मदद मिलती है।

नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी और दिए गए कंटेंट पर आधारित है।    

 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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