पैरों में झुनझुनी को हल्के में न लें! ये 10 गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 12:08 PM (IST)
नारी डेस्क : अक्सर लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, पैर मोड़कर रखने या लेटने के बाद पैरों में झुनझुनी महसूस होना सामान्य बात है। ऐसा नसों पर अस्थायी दबाव पड़ने के कारण होता है और कुछ मिनट में अपने-आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन या जलन महसूस हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह शरीर में किसी बीमारी या पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं उन 10 प्रमुख कारणों के बारे में, जिनकी वजह से पैरों में बार-बार झुनझुनी हो सकती है।
नसों पर दबाव (Pinched Nerve)
जब किसी नस पर दबाव पड़ता है तो पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना, रीढ़ की हड्डी की समस्या या स्लिप डिस्क जैसी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।

शरीर में जहरीले तत्व (Toxins) जमा होना
कुछ जहरीले रसायनों या धातुओं जैसे आर्सेनिक, मरकरी (Mercury) या एंटीफ्रीज के संपर्क में आने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे पैरों में झुनझुनी, जलन या कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
जरूरत से ज्यादा शराब पीना
लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन करने से अल्कोहॉलिक न्यूरोपैथी (Alcoholic Neuropathy) हो सकती है। शराब नसों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पैरों में झुनझुनी, दर्द, सुन्नपन और मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है।
यें भी पढ़ें : बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं में आम हैं ये 4 परेशानियां, जानें कारण
एंजायटी और तनाव
मानसिक तनाव या एंजायटी के दौरान कुछ लोगों को हाथ-पैरों में झुनझुनी महसूस हो सकती है। इसके साथ तेज धड़कन, सांस फूलना, चक्कर आना या सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 नसों के सही काम करने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर पैरों में झुनझुनी, हाथ-पैर सुन्न होना, कमजोरी, थकान, चक्कर आना और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डायबिटीज (मधुमेह)
लगातार हाई ब्लड शुगर रहने से नसें धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy) कहा जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में पैरों में झुनझुनी, जलन और सुन्नपन शामिल हैं।
किडनी की बीमारी
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसका असर नसों पर भी पड़ सकता है, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी और कमजोरी महसूस हो सकती है।
यें भी पढ़ें : गुणों से भरपूर मखाना इन 5 लोगों को नहीं खाना चाहिए
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (Peripheral Artery Disease)
इस बीमारी में पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण पैरों में झुनझुनी, दर्द, ठंडापन और चलने में परेशानी हो सकती है।
ऑटोइम्यून बीमारियां
ल्यूपस, सीलिएक डिजीज, रुमेटॉइड आर्थराइटिस और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही नसों को नुकसान पहुंचाने लगती है। इसके कारण हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन हो सकता है।

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
कुछ दवाएं, जैसे कीमोथेरेपी की दवाएं, मिर्गी (Epilepsy) की दवाएं और हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं, नसों पर असर डाल सकती हैं। इनके कारण पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। यदि दवा शुरू करने के बाद ऐसा महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
डायबिटीज के मरीज
विटामिन B12 की कमी वाले लोग
अधिक शराब पीने वाले लोग
किडनी रोग से पीड़ित मरीज
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में काम करने वाले लोग
बढ़ती उम्र के लोग
नसों से जुड़ी बीमारी वाले मरीज।
यें भी पढ़ें: इन Blood Group वालों को सबसे ज्यादा काटते हैं मच्छर! जानिए क्या कहती है रिसर्च
अगर आपको ऐसा महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें
झुनझुनी लगातार बनी रहे या बार-बार हो।
हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होने लगे।
चलने-फिरने में परेशानी हो।
तेज दर्द या जलन लगातार बनी रहे।
पेशाब या मल पर नियंत्रण कम हो जाए।
चेहरे, हाथ या पैर के एक हिस्से में अचानक सुन्नपन हो।
बोलने या देखने में दिक्कत होने लगे।

बचाव के आसान उपाय
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
विटामिन B12 और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
नियमित व्यायाम करें और रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
पैरों में कभी-कभार झुनझुनी होना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह समस्या बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ दर्द, कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से कई गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है और उनका प्रभावी उपचार संभव है।

