टाइप-2 डायबिटीज है तो डेंगू को न लें हल्के में, रिसर्च में सामने आई बड़ी बात
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 11:55 AM (IST)
नारी डेस्क: मानसून के दौरान डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। ऐसे में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई शोध और विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि डायबिटीज के मरीजों में डेंगू गंभीर रूप लेने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे मरीजों में संक्रमण के बाद जटिलताएं बढ़ सकती हैं, इसलिए समय रहते बचाव और सही इलाज बेहद जरूरी माना जाता है।
डायबिटीज में क्यों बढ़ जाता है डेंगू का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण डेंगू वायरस शरीर में तेजी से असर कर सकता है। ऐसे मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से गिरने, आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि मरीज की उम्र अधिक है, वह मोटापे से ग्रस्त है, किडनी की बीमारी से पीड़ित है या उसका ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहता, तो गंभीर डेंगू की आशंका और बढ़ सकती है।

भारत में बड़ी संख्या में डायबिटीज मरीज, इसलिए बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। इस बीमारी से जूझ रहे लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और गंभीर संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में दो से चार गुना तक अधिक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में मरीजों का ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं रहता। ऐसे में डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले डायबिटीज मरीजों की नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ डेंगू से बचाव के उपायों और उपलब्ध वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वेशनल स्टडी और मेटा-एनालिसिस भी संकेत देते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में गंभीर डेंगू और मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
डेंगू के शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डायबिटीज मरीजों में डेंगू के शुरुआती लक्षण सामान्य लोगों जैसे ही हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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इन गंभीर संकेतों पर तुरंत लें मेडिकल मदद
अगर डेंगू के दौरान लगातार उल्टी हो, पेट में तेज दर्द महसूस हो, अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती बनी रहे, मसूड़ों या नाक से खून आने लगे, पेशाब कम होने लगे, चक्कर आने लगें या ब्लड शुगर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए या बहुत कम हो जाए, तो इसे गंभीर स्थिति का संकेत माना जा सकता है। ऐसे मामलों में बिना देरी किए अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
डायबिटीज मरीज ऐसे करें डेंगू से बचाव
विशेषज्ञों की सलाह है कि डायबिटीज से पीड़ित लोग मच्छरों से बचाव के लिए नियमित रूप से मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है।इसके साथ ही ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी बेहद जरूरी है। यदि बुखार एक-दो दिन से अधिक समय तक बना रहे तो जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

डेंगू होने पर दवाओं में बदलाव की पड़ सकती है जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी डायबिटीज मरीज को डेंगू हो जाता है, तो उसकी स्थिति, शरीर में पानी की मात्रा और भोजन लेने की क्षमता को देखते हुए कुछ डायबिटीज दवाओं में अस्थायी बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि ऐसा केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।इलाज के दौरान ब्लड शुगर, प्लेटलेट्स काउंट और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी करना बेहद जरूरी होता है। समय पर जांच और उचित इलाज से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और डेंगू दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं जिनमें लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं और डेंगू के किसी भी लक्षण का अनुभव हो रहा है, तो घरेलू इलाज या स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर पहचान, सही इलाज और लगातार निगरानी ही गंभीर जोखिमों से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

