Desk Job आपके कूल्हों को कर रही बर्बाद, Hips के साथ घुटने और पैर भी हो रहे कमजोर

punjabkesari.in Saturday, Jul 11, 2026 - 01:36 PM (IST)

नारी डेस्क: काम पर या घर पर बहुत देर तक बैठे रहने से सेहत से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं जैसे डिप्रेशन, खान-पान की खराब आदतें और दिल की बीमारियां। इसके अलावा एक और समस्या हो जाती है जिसका नाम भले ही अजीब लगे लेकिन यह गंभीर हो सकती है। इसका नाम है 'डेड बट सिंड्रोम' इसे तकनीकी भाषा में "ग्लूटियल एमनेसिया" कहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति के कूल्हे की मांसपेशियां अपना काम करना भूल जाती हैं  यानी पेल्विस को स्थिर रखना और शरीर के अलाइनमेंट को बनाए रखना  क्योंकि वे लंबे समय तक बिना किसी हरकत के रहती हैं।


'डेड बट सिंड्रोम' के बारे में  जरूरी बातें

लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने या सुस्त जीवनशैली से आपके हिप फ्लेक्सर्स (कूल्हे की मांसपेशियां) टाइट हो सकते हैं और ग्लूटियल मांसपेशियां (कूल्हे के पिछले हिस्से की मांसपेशियां) खिंचकर लंबी हो सकती हैं, जिससे मांसपेशियों का सही तरीके से काम करना मुश्किल हो जाता है। दोनों मांसपेशियों को एक-दूसरे के विपरीत तरीके से छोटा और लंबा होना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका बट (कूल्हा) सच में मर गया है: यह शब्द बस एक संकेत है। एक्सरसाइज़ और मूवमेंट से 'डेड बट' को ठीक करने में इस स्थिति के बनने में लगे समय से लगभग दोगुना समय लगता है।


शरीर के दूसरे हिस्सों में दिखते हैं लक्षण

 'डेड बट सिंड्रोम' वाले कुछ लोगों को उस जगह से दूर भी परेशानी महसूस होती है।  ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शारीरिक रूप से "सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है।" टाइट हिप फ्लेक्सर्स से पीठ दर्द हो सकता है। कमज़ोर ग्लूट्स से संतुलन की समस्या के साथ-साथ घुटने और पैर में दर्द भी हो सकता है। यह शारीरिक रूप से फिट लोगों को भी हो सकता है। जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें भी इसका खतरा हो सकता है। वर्कआउट में स्क्वैट्स और लेग लिफ्ट्स को शामिल करने से मदद मिल सकती है, लेकिन सही बॉडी मैकेनिक्स के साथ इन्हें करना भी ज़रूरी है।


अपने कूल्हों को एक्टिव रखने का एक आसान तरीका?


डेड बट सिंड्रोम से बचाव का सबसे आसान तरीका है लंबे समय तक बैठने के बाद थोड़ी-थोड़ी देर टहलना और चलना-फिरना, जैसे कि हर घंटे उठना। सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जाना विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है। अगर आपको याद दिलाने की ज़रूरत हो, तो अपने फ़ोन या कंप्यूटर पर हर घंटे या आधे घंटे में अलर्ट करने वाला टाइमर सेट कर लें। चलने-फिरने से जकड़े हुए हिस्सों में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और आपके "डेड बट" को फिर से सक्रिय करने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर, जितना हो सके सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की कोशिश करें। इससे न केवल डेड बट सिंड्रोम से प्रभावित मांसपेशियां और टेंडन सक्रिय होते हैं, बल्कि यह वजन कम करने और हृदय संबंधी व्यायाम का भी अच्छा साधन है। 


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Content Writer

vasudha

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