क्या आप भी रोज पीते हैं कॉफी, तो जानिए ये आपके शरीर को फायदा देती है या नुकसान

punjabkesari.in Friday, Jun 26, 2026 - 08:02 PM (IST)

नारी डेस्क: कॉफी यूथ की एक पसंदीदा ड्रिंक है जो भुने हुए या पिसे हुए अरेबिका या रोबस्टा कॉफ़ी बीन्स से बनती है। कॉफ़ी का रंग गहरा और स्वाद कड़वा होता है और इसमें कैफ़ीन होता है। यह नैचुरल स्टिमुलेंट सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट करता है, जिससे अलर्टनेस, एनर्जी और कॉन्संट्रेशन बढ़ता है।  सालों तक मेडिकल एक्सपर्ट्स लोगों को कम कॉफ़ी पीने की सलाह देते रहे, क्योंकि ज़्यादातर रिसर्च में यह बात सामने आई थी कि कॉफ़ी से दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ सकता है। हालाकि, हाल ही में हुई कई स्टडीज़ में कॉफ़ी के सेहत से जुड़े ऐसे फ़ायदे सामने आए हैं जिनके बारे में पहले पता नहीं था। चलिए जानते हैं रोजाना कॉफी का एक कप पीने के फायदे हैं या नुकसान 


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कॉफी से मिलते हैं ये फायदे


कॉफी में पाए जाने वाले कैफीन, ऑर्गेनिक कंपाउंड और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट के सेहत से जुड़े कई फ़ायदे हैं, जिन्हें रिसर्च से भी साबित किया गया है, जैसे:

याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और मूड को बेहतर बनाती है: कैफीन जो कॉफी में पाया जाने वाला एक मुख्य बायोएक्टिव कंपाउंड है, दिमाग और सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) को स्टिम्युलेट करता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता, याददाश्त और मूड बेहतर होता है। कैफीन सतर्कता और एकाग्रता को भी बढ़ाता है।

दिल की बीमारियों का ख़तरा कम करती है: रिसर्च के अनुसार, रोज़ाना 2-3 कप ब्लैक कॉफ़ी पीने से खासकर सुबह का पहला कप दिल की धड़कन में गड़बड़ी का खतरा कम होता है, जिससे हार्ट फ़ेलियर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक हो सकता है।

अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस बीमारी का ख़तरा कम करती है: स्टडीज़ से पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से ब्लैक कॉफ़ी पीते हैं, उनमें डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का ख़तरा कम होता है। उनमें ब्रेनस्टेम न्यूरल डीजेनरेशन भी कम होता है, जो पार्किंसंस बीमारी का एक कारण है।

टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा कम करती है: कई स्टडीज़ के अनुसार, नियमित रूप से ब्लैक कॉफ़ी पीने से टाइप 2 डायबिटीज का ख़तरा कम होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कॉफी इंसुलिन सेंसिटिविटी और ग्लूकोज़ मेटाबॉलिज़्म को प्रभावित करती है।

कैंसर का ख़तरा कम करती है: कॉफ़ी में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जिनमें क्लोरोजेनिक एसिड, फेनोलिक एसिड और मेलानोइडिन शामिल हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने, बैक्टीरिया से लड़ने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इससे लिवर कैंसर, कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और एंडोमेट्रियल कैंसर जैसे कुछ कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है।
 

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कॉफ़ी के क्या साइड इफ़ेक्ट हैं?

न्यूट्रिशनिस्ट सलाह देते हैं कि एक दिन में 4 कप से ज़्यादा कॉफ़ी (लगभग 300-400 मिलीग्राम कैफ़ीन) न पीएं। ज़्यादा कैफीन लेने से शरीर के कई सिस्टम पर असर पड़ सकता है, जैसे:कैफ़ीन की ज़्यादा मात्रा से बेचैनी, एंग्जायटी, नींद न आना, सिरदर्द और कभी-कभी दौरे पड़ सकते हैं।  ज़्यादा कैफ़ीन से डाइजेस्टिव जूस और पेट के एसिड का प्रोडक्शन बढ़ जाता है, जो गैस्ट्रिक या आंतों के अल्सर वाले लोगों के लिए अच्छा नहीं है। कैफ़ीन दिल को स्टिम्युलेट करता है और कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जिससे हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) वाले लोगों में दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है। जब तरल पदार्थ किडनी से होकर गुज़रता है, तो कैफ़ीन किडनी में पानी के दोबारा अवशोषण (reabsorption) में बाधा डालता है। इससे किडनी ज़्यादा पानी बाहर निकालती है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और पेशाब के ज़रिए सामान्य से ज़्यादा कैल्शियम बाहर निकल जाता है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट में पथरी बन सकती है और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन व किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।


रोज़ाना कितनी कैफीन लेनी चाहिए?

डॉक्टर स्वस्थ वयस्कों को कैफीन का सेवन 300–400 मिलीग्राम से ज़्यादा न करने की सलाह देते हैं। 7-9 ग्राम कॉफी पाउडर के आधार पर, एक कप कॉफी में कैफीन की मात्रा लगभग इस प्रकार होती है:

-ब्लैक कॉफी: 80-100 मिलीग्राम प्रति कप (240 ml)
-फ्रेश कॉफ: 100 मिलीग्राम प्रति कप (लगभग 148 ml)
एस्प्रेसो: 63 मिलीग्राम प्रति शॉट (30 ml)
डर्टी कॉफी: 63-75 मिलीग्राम प्रति शॉट
-3-इन-1 कॉफ़ी: 80 मिलीग्राम प्रति पैकेट (सैशे)
-कैन वाली कॉफी: 150-160 मिलीग्राम प्रति कैन

कैफीन की सही मात्रा कॉफी बीन के प्रकार, बनाने के तरीके और कॉफी कप के साइज के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।


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Content Writer

vasudha

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