चंद्र ग्रहण के साए में अगर किसी की हो जाए मृत्यु तो क्या बदल जाता है अंतिम संस्कार का तरीका?
punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 03:41 PM (IST)
नारी डेस्क : हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को अशुभ काल माना गया है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज करना आवश्यक समझा जाता है, ताकि ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव जीवन पर न पड़े। ऐसे समय में अक्सर यह सवाल उठता है कि यदि चंद्र ग्रहण के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो क्या अंतिम संस्कार के नियमों में बदलाव करना जरूरी है?
चंद्र ग्रहण 2026
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने तक विवाह, पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते। इसी वजह से यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु ग्रहण काल में हो जाए, तो अंतिम संस्कार को लेकर भी लोगों में संशय और चिंता बनी रहती है।

ग्रहण काल में मृत्यु हो जाए तो क्या करें?
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु ग्रहण के दौरान हो जाए, तो सामान्य स्थिति में अंतिम संस्कार ग्रहण समाप्त होने के बाद करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण काल में अग्नि प्रज्ज्वलित करना और संस्कार करना शुभ नहीं होता।
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क्या ग्रहण के दौरान अंतिम संस्कार किया जा सकता है?
धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि मृत शरीर को अधिक समय तक रखना उचित नहीं होता। इसलिए यदि परिस्थिति ऐसी हो कि इंतजार संभव न हो जैसे गर्मी का मौसम या अन्य व्यावहारिक कारण तो आपात स्थिति में ग्रहण काल के दौरान भी अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसे दोषपूर्ण नहीं माना जाता।

शुद्धि का विशेष नियम
यदि ग्रहण काल में ही अंतिम संस्कार करना पड़े, तो ग्रहण समाप्त होते ही स्नान करना जरूरी माना गया है। घर और आसपास की जगह की शुद्धि व सफाई करनी चाहिए। पूजा-पाठ और धार्मिक क्रियाएं ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करनी चाहिए। मान्यता है कि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा ग्रहण समाप्त होने के साथ ही खत्म होती है, इसलिए शुद्धिकरण आवश्यक होता है।
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धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण का समय अशुभ माना जाता है, लेकिन मृत्यु जैसी परिस्थिति में मानवता और व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी गई है। शास्त्र यह स्पष्ट करते हैं कि नियमों के साथ-साथ परिस्थितियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

