युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं 7 तरह के कैंसर, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 10:28 AM (IST)
नारी डेस्क: कैंसर को आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में कुछ कैंसर के मामले पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़े हैं। अध्ययन में प्रोस्टेट, आंत, किडनी, गर्भाशय, स्तन, अग्नाशय और लिवर कैंसर जैसे सात प्रकार के कैंसर को लेकर बढ़ते मामलों पर ध्यान दिया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मोटापा बढ़ना, खान-पान में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब और धूम्रपान जैसी आदतें इसके पीछे संभावित कारणों में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, कैंसर के बढ़ने के पीछे सिर्फ एक कारण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी
अध्ययन के मुताबिक, 50 साल से कम उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। इंग्लैंड के आंकड़ों में 2001 में इस उम्र के लोगों में प्रति एक लाख पर करीब 1 मामला सामने आया था, जो 2023 तक बढ़कर 3.6 मामले प्रति एक लाख हो गया। यानी कम उम्र में प्रोस्टेट कैंसर की पहचान पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो रही है। विशेषज्ञ इसे चिंता का विषय मान रहे हैं और कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं।

आंतों के कैंसर के मामले भी बढ़े
50 साल से कम उम्र के लोगों में आंतों के कैंसर के मामलों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंग्लैंड के आंकड़ों के अनुसार, 2001 में इस उम्र के लोगों में प्रति एक लाख पर 3.9 मामले थे, जो 2023 में बढ़कर 8.4 मामले हो गए। आंतों के कैंसर के शुरुआती संकेतों में मल में खून आना, लंबे समय तक कब्ज या दस्त रहना, पेट की आदतों में बदलाव और बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
महिलाओं में भी बढ़ रहा खतरा
कम उम्र की महिलाओं में स्तन और गर्भाशय के कैंसर के मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। अध्ययन में 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर की दर 2001 में प्रति एक लाख 42 मामलों से बढ़कर 2023 में 47.5 तक पहुंच गई।वहीं, कम उम्र में गर्भाशय के कैंसर के मामलों में भी वृद्धि हुई। 2023 में इसकी दर प्रति एक लाख महिलाओं पर करीब 3.9 मामले बताई गई।
किडनी कैंसर के मामलों में भी इजाफा
कम उम्र के लोगों में किडनी कैंसर के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2023 में इसकी दर प्रति एक लाख लोगों पर करीब 3 मामले तक पहुंच गई। किडनी कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में मोटापा, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में कैंसर का कारण अलग हो सकता है।

कौन-कौन से 7 कैंसर चिंता का कारण
अध्ययन में कम उम्र के लोगों में जिन कैंसर को लेकर बढ़ते मामलों की बात सामने आई है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-
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प्रोस्टेट कैंसर
आंतों का कैंसर
किडनी कैंसर
गर्भाशय का कैंसर
स्तन कैंसर
अग्नाशय का कैंसर
लिवर कैंसर
क्यों बढ़ रहा है कम उम्र में कैंसर का खतरा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण एक साथ काम कर सकते हैं। इनमें बदलती जीवनशैली और रोजमर्रा की आदतें महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
बढ़ता मोटापा
पिछले कुछ वर्षों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है। शरीर में ज्यादा फैट जमा होने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है और कुछ कैंसर से भी इसका संबंध पाया गया है।
खराब खान-पान
बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मीठे खाद्य पदार्थ और असंतुलित आहार लंबे समय में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित आहार को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी
लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी मोटापे और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करना शरीर के लिए फायदेमंद है।
शराब और धूम्रपान
शराब और तंबाकू का सेवन कई तरह के कैंसर के जोखिम से जुड़ा हुआ है। कम उम्र में इन आदतों की शुरुआत होने पर लंबे समय में इसका असर ज्यादा हो सकता है।
प्रदूषण और रसायन
वायु प्रदूषण, कुछ रसायनों और अन्य पर्यावरणीय प्रदूषकों के संपर्क को भी कैंसर के जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति में कैंसर होने की वजह केवल एक कारक से तय नहीं की जा सकती।
भारत में भी कैंसर के मामले बड़ी चिंता
भारत में भी कैंसर का बढ़ता बोझ चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हर 10 में से करीब 1 भारतीय को 75 साल की उम्र से पहले कैंसर होने का खतरा बताया गया है। 2024 में भारत में करीब 16 लाख नए कैंसर के मामले सामने आने और लगभग 9 लाख मौतों का अनुमान दिया गया है। वहीं, पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत में 32.5 लाख से ज्यादा लोगों में कैंसर की पहचान होने की बात कही गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारणों पर प्रभावी तरीके से काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत में नए मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, 2050 तक देश में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या करीब 28 लाख तक पहुंच सकती है।
कम उम्र में भी शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
कम उम्र में कैंसर का खतरा बढ़ने की खबर का मतलब यह नहीं है कि हर युवा व्यक्ति को कैंसर होने वाला है। लेकिन शरीर में लंबे समय से बने किसी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। बिना वजह वजन कम होना, शरीर में किसी गांठ का महसूस होना, लंबे समय तक रहने वाला दर्द, मल या पेशाब में खून, लगातार पाचन संबंधी परेशानी, असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, शराब से परहेज और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। कैंसर के मामले में समय पर पहचान और इलाज काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

