गुटखा खाने वालों सावधान! इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज ,बढ़ रहा मुंह के कैंसर का खतरा
punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 03:07 PM (IST)
नारी डेस्क: कभी मुंह के कैंसर को 40 से 50 साल की उम्र के बाद होने वाली बीमारी माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के मरीज भी डॉक्टरों तक पहुंच रहे हैं। कानपुर के जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में 20 से 30 साल की उम्र के मरीज भी मुंह के कैंसर की जांच और इलाज के लिए आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, गुटखा, सुपारी और तंबाकू का लंबे समय तक इस्तेमाल मुंह की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।
20 से 35 साल के मरीज भी पहुंच रहे अस्पताल
पहले मुंह के कैंसर के लिए आमतौर पर 40 से 60 साल की उम्र के मरीज ज्यादा आते थे। अब 20 से 35 साल की उम्र के मरीज भी देखने को मिल रहे हैं। उनका कहना है कि गुटखा, सुपारी और पान मसाला जैसी चीजों को घंटों मुंह में दबाकर रखने से मुंह की अंदरूनी त्वचा पर लगातार असर पड़ सकता है।

छोटे छाले को भी न करें नजरअंदाज
मुंह में छाला या घाव होना आम बात है और हर छाला कैंसर नहीं होता। लेकिन अगर कोई घाव लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। डॉ. के मुताबिक, अगर मुंह का छाला या घाव करीब 15 दिन तक बना रहे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से बीमारी का कारण पता चल सकता है और अगर कोई गंभीर समस्या है तो उसका इलाज भी जल्द शुरू किया जा सकता है।
गुटखा और तंबाकू से मुंह की अंदरूनी त्वचा पर असर
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के मुताबिक, गुटखा, खैनी और सुपारी जैसे तंबाकू उत्पाद मुंह के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने से मुंह की अंदरूनी त्वचा में बदलाव हो सकते हैं। लगातार तंबाकू या सुपारी का इस्तेमाल करने वालों में मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे, जलन और मुंह खोलने में परेशानी जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर भी डॉ. संजय काला को प्राचार्य एवं डीन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
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मुंह में ये बदलाव दिखें तो हो जाएं सतर्क
अगर मुंह में इनमें से कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है
मुंह का छाला या घाव 15 दिन से ज्यादा समय तक ठीक न होना
जीभ या गाल के अंदर लाल या सफेद पैच दिखाई देना
मुंह खोलने में परेशानी होना
घाव से खून आना
लगातार दर्द या जलन रहना
जीभ या गाल में लंबे समय तक कोई असामान्य बदलाव महसूस होना इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता, लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों की जांच जरूरी है।

कानपुर में अलग-अलग पाउच में बिक रहा तंबाकू
खबर के मुताबिक, कानपुर के पनकी, सचेंडी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पान मसाला और तंबाकू अलग-अलग पाउच में बिकते दिखाई देते हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक इन उत्पादों की मांग करते हैं और थोक विक्रेताओं से भी इन्हें उपलब्ध कराया जाता है। पनकी-जवाहरपुरम के दुकानदार आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि थोक विक्रेता से मिलने वाले माल में तंबाकू वाले उत्पाद भी शामिल होते हैं और ग्राहक मांग करने पर उन्हें दे दिए जाते हैं। वहीं गड़रियन पुरवा के दुकानदार रमेश ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए पान मसाला बेचना उनकी रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है।
छह महीने में 50 जगहों से लिए गए सैंपल
सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय संजय प्रताप सिंह के मुताबिक, खाद्य विभाग समय-समय पर पान मसाला के नमूने लेता है। उनके अनुसार पिछले छह महीनों में शहर के करीब 50 स्थानों से सैंपल लिए गए हैं। इस बीच जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बचाव का सबसे जरूरी कदम क्या है?
मुंह के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए तंबाकू, गुटखा और सुपारी जैसे उत्पादों से दूरी बनाना सबसे अहम कदमों में से एक है। अगर मुंह में कोई ऐसा घाव या बदलाव दिखाई दे जो लगातार बना हुआ है, तो घरेलू उपायों के भरोसे लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय दंत चिकित्सक, ईएनटी विशेषज्ञ या कैंसर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
खासकर युवाओं में तंबाकू और गुटखे की आदत को सामान्य मानना ठीक नहीं है। समय रहते इस आदत को छोड़ना और मुंह में होने वाले लगातार बदलावों पर ध्यान देना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

