शरीर में क्यों होने लगती है आयोडीन की कमी? जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके
punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 12:35 PM (IST)
नारी डेस्क : आयोडीन शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में से एक है। यह थायरॉयड हार्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाता है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ग्रोथ और विकास समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। अगर डाइट में लंबे समय तक पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो शरीर में इसकी कमी हो सकती है और थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खासकर गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और बच्चों के लिए पर्याप्त आयोडीन बेहद जरूरी माना जाता है।
क्या होती है आयोडीन की कमी?
आयोडीन की कमी तब होती है जब शरीर को जरूरत के मुताबिक आयोडीन नहीं मिल पाता। हमारा शरीर खुद आयोडीन नहीं बनाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन के जरिए करनी पड़ती है। आयोडीन की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन बनाने में सक्षम नहीं हो पाती। गंभीर कमी की स्थिति में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। गर्भावस्था में भी पर्याप्त आयोडीन मिलना जरूरी है, क्योंकि इसकी कमी मां और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है।

शरीर में आयोडीन की कमी क्यों होती है?
आयोडीन की कमी का सबसे प्रमुख कारण डाइट में पर्याप्त आयोडीन का न होना है। मिट्टी और पानी में आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में भी इसकी मात्रा अलग हो सकती है। इसी वजह से दुनिया के कुछ क्षेत्रों में आयोडीन की कमी का जोखिम ज्यादा पाया जाता है। पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित इलाकों की मिट्टी से आयोडीन के बह जाने के कारण वहां इसकी कमी की समस्या देखी जा सकती है।
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आयोडीन की कमी से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
जब शरीर में आयोडीन कम होता है तो थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण थायरॉयड ग्रंथि पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और कुछ लोगों में गॉइटर यानी थायरॉयड ग्रंथि के बढ़ने की समस्या हो सकती है। आयोडीन की गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली कमी खासकर बच्चों में चिंता का विषय है। इससे उनके दिमागी विकास, सीखने की क्षमता और शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है।

महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में जोखिम
महिलाओं के लिए भी पर्याप्त आयोडीन जरूरी है। इसकी कमी से गॉइटर और हाइपोथायरॉयडिज्म जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की जरूरत बढ़ जाती है। गंभीर कमी की स्थिति में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं और बच्चे के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ने का जोखिम हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइट और आयोडीन की जरूरत को लेकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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बच्चों में आयोडीन की कमी का असर
शिशुओं और छोटे बच्चों के विकास के लिए थायरॉयड हार्मोन महत्वपूर्ण होते हैं। लंबे समय तक आयोडीन की गंभीर कमी रहने पर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। बड़े बच्चों में थायरॉयड की समस्या होने पर पढ़ाई और सामान्य विकास भी प्रभावित हो सकता है।

आयोडीन की कमी से कैसे बचें?
आयोडीन की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका संतुलित डाइट लेना है। आयोडीन युक्त नमक आयोडीन की कमी को रोकने का एक प्रभावी और आम तरीका है। हालांकि, नमक की मात्रा भी सीमित रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। अगर आपको आयोडीन की कमी या थायरॉयड से जुड़ी समस्या का संदेह है, तो खुद से आयोडीन सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह लेना बेहतर है। शरीर में आयोडीन की कमी की पुष्टि जरूरत के अनुसार मेडिकल टेस्ट से की जा सकती है।

