बार-बार Antibiotic लेने की आदत पड़ सकती है भारी, जानें शरीर में क्या होता है असर

punjabkesari.in Sunday, Sep 06, 2026 - 11:33 AM (IST)

नारी डेस्क : सर्दी-जुकाम, गले में दर्द, बुखार या किसी इंफेक्शन के लक्षण दिखाई देते ही कई लोग खुद से एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बार-बार एंटीबायोटिक खाने से शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। लेकिन क्या वाकई एंटीबायोटिक सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कहना सही नहीं है कि एंटीबायोटिक लेने से सीधे शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। एंटीबायोटिक का मुख्य काम कुछ खास बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज करना है। हालांकि, जरूरत न होने पर या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की है।

क्या एंटीबायोटिक लेने से इम्यूनिटी कमजोर होती है?

सीधे तौर पर एंटीबायोटिक को इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली दवा कहना सही नहीं है। जब शरीर में बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्शन होता है, तब डॉक्टर स्थिति के अनुसार एंटीबायोटिक लिख सकते हैं। लेकिन बिना जरूरत या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से शरीर के गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन पर असर पड़ सकता है। इनमें कुछ ऐसे बैक्टीरिया भी होते हैं जो शरीर के सामान्य स्वास्थ्य में भूमिका निभाते हैं। इसलिए एंटीबायोटिक को इम्यूनिटी बढ़ाने या सामान्य बुखार की दवा समझकर लेना सही नहीं है।

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बार-बार एंटीबायोटिक लेने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं
पेट दर्द, मतली या दस्त जैसी समस्या
आंतों के सामान्य बैक्टीरिया के संतुलन में बदलाव
कुछ मामलों में एलर्जी या अन्य साइड इफेक्ट
भविष्य में कुछ एंटीबायोटिक्स का असर कम होना
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ना
हर व्यक्ति में इनका जोखिम और असर अलग हो सकता है।

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सबसे बड़ा खतरा है Antibiotic Resistance

बार-बार या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस है। जब बैक्टीरिया बार-बार एंटीबायोटिक के संपर्क में आते हैं, तो उनमें ऐसी क्षमता विकसित हो सकती है जिससे कुछ दवाएं उन पर पहले की तरह प्रभावी नहीं रहतीं। ऐसी स्थिति में इंफेक्शन का इलाज मुश्किल हो सकता है और डॉक्टर को दूसरी या अधिक उपयुक्त दवा का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ एंटीबायोटिक के सही बीमारी में, सही दवा और सही अवधि तक इस्तेमाल पर जोर देते हैं।

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हर बुखार और सर्दी-जुकाम में नहीं चाहिए एंटीबायोटिक

यह बात समझना बेहद जरूरी है कि हर बुखार, सर्दी-जुकाम या गले के दर्द में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। कई सामान्य सर्दी-जुकाम वायरल इंफेक्शन के कारण होते हैं, जबकि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती हैं। ऐसे मामलों में खुद से एंटीबायोटिक लेने से फायदा नहीं होता और अनावश्यक रूप से दवा लेने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए लक्षणों के आधार पर खुद दवा लेने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

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डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी है तो इन बातों का रखें ध्यान

अगर डॉक्टर ने जांच या बीमारी की स्थिति को देखते हुए एंटीबायोटिक लिखी है, तो उसे निर्धारित मात्रा और तरीके से लें। दवा शुरू करने, बंद करने या उसकी डोज बदलने का फैसला खुद से न करें। अगर दवा लेने के बाद कोई गंभीर साइड इफेक्ट दिखाई दे या बीमारी में सुधार न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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क्या अच्छे बैक्टीरिया पर भी पड़ता है असर?

हां, कुछ एंटीबायोटिक्स बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया के साथ-साथ शरीर में मौजूद कुछ सामान्य बैक्टीरिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर खासतौर पर आंतों के माइक्रोबायोम के संतुलन पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार एंटीबायोटिक लेने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाएगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक लेना आमतौर पर उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

नोट:  बार-बार एंटीबायोटिक लेने से सीधे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, ऐसा कहना सही नहीं है। लेकिन बिना जरूरत या गलत तरीके से इन दवाओं का इस्तेमाल शरीर में दूसरे नुकसान और खासतौर पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक को सामान्य बुखार या सर्दी-जुकाम की दवा न समझें और डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल न करें।


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Content Editor

Monika

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