MRI Scan की जरूरत कब पड़ती है? शरीर के किन हिस्सों की जांच के लिए होता है इस्तेमाल
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 10:34 AM (IST)
नारी डेस्क: कई बार शरीर में परेशानी तो होती है, लेकिन उसके पीछे की वजह सामान्य जांच या बाहर से दिखाई देने वाले लक्षणों से साफ नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में डॉक्टर कुछ खास मेडिकल टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इन्हीं में से एक है MRI Scan। इसकी मदद से शरीर के अंदर मौजूद कई अंगों और टिश्यू की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे डॉक्टर को बीमारी या चोट की सही वजह समझने में मदद मिल सकती है। MRI का इस्तेमाल केवल किसी एक बीमारी की जांच के लिए नहीं होता। शरीर के जिस हिस्से में परेशानी हो, उसके आधार पर डॉक्टर ब्रेन, रीढ़ की हड्डी, घुटने, कंधे, पेट या शरीर के दूसरे हिस्सों का MRI कराने की सलाह दे सकते हैं। आइए जानते हैं MRI क्या होता है और किन स्थितियों में यह जांच काम आती है।
MRI Scan क्या होता है
MRI यानी Magnetic Resonance Imaging एक ऐसी मेडिकल इमेजिंग जांच है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की मदद से शरीर के अंदर के हिस्सों की विस्तृत तस्वीरें तैयार की जाती हैं। इस जांच में मरीज को एक विशेष मशीन के अंदर लिटाया जाता है और मशीन शरीर के अलग-अलग हिस्सों की इमेज तैयार करती है। इन तस्वीरों की मदद से डॉक्टर शरीर के अंगों के साथ-साथ मांसपेशियों, नसों, हड्डियों और सॉफ्ट टिश्यू में होने वाले बदलावों को देखने की कोशिश करते हैं। जरूरत के मुताबिक शरीर के किसी खास हिस्से का MRI किया जा सकता है। कुछ MRI जांचों में डॉक्टर मरीज को कॉन्ट्रास्ट डाई भी दे सकते हैं, जिससे शरीर के कुछ हिस्से या असामान्य टिश्यू तस्वीरों में ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकें। यह हर MRI में जरूरी नहीं होता।

दिमाग से जुड़ी समस्याओं की जांच में मददगार
ब्रेन से जुड़ी कई समस्याओं को समझने के लिए MRI काफी उपयोगी इमेजिंग टेस्ट हो सकता है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर इसकी सलाह दे सकते हैं। ब्रेन MRI की मदद से ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस, सूजन, रक्तस्राव और मस्तिष्क के टिश्यू में होने वाले अन्य बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। लगातार सिरदर्द, दौरे, कमजोरी, चक्कर या शरीर के किसी हिस्से में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों के मामले में डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्रेन इमेजिंग कराने का फैसला कर सकते हैं।
रीढ़ की हड्डी और नसों की समस्या में भी होता है इस्तेमाल
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमर या गर्दन में दर्द है, हाथ-पैर में झनझनाहट या कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर कुछ मामलों में MRI की सलाह दे सकते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी, डिस्क और उसके आसपास की नसों की स्थिति को अधिक विस्तार से देखा जा सकता है। MRI से स्लिप डिस्क, नस पर दबाव, स्पाइनल कॉर्ड में बदलाव और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कई अन्य समस्याओं की जांच में मदद मिल सकती है। खासकर तब जब सामान्य जांच से समस्या की वजह स्पष्ट न हो रही हो।
ये भी पढ़ें: रात में रोज 3 बजे उठकर यूरिन आना क्या Normalहै? जानिए कारण
घुटने, कंधे और मांसपेशियों की चोट में उपयोगी
खेल के दौरान लगी चोट हो या रोजमर्रा की गतिविधियों के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन या परेशानी कुछ मामलों में MRI की जरूरत पड़ सकती है। घुटने, कंधे, कलाई और दूसरे जोड़ों की अंदरूनी स्थिति समझने के लिए यह जांच की जाती है। इससे लिगामेंट, टेंडन, कार्टिलेज और मांसपेशियों में हुई चोट को देखने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से खिलाड़ियों में स्पोर्ट्स इंजरी की जांच के लिए भी MRI का इस्तेमाल किया जाता है।
शरीर में ट्यूमर या असामान्य गांठ की जांच
शरीर के कुछ हिस्सों में गांठ या असामान्य बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर MRI कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे गांठ या ट्यूमर की स्थिति, उसका आकार और आसपास के टिश्यू पर उसके प्रभाव को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल MRI में किसी गांठ के दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि वह कैंसर ही है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य जांच, जैसे बायोप्सी या दूसरी इमेजिंग टेस्ट, की मदद से इसकी पुष्टि करते हैं।

पेट और पेल्विस की जांच में भी हो सकता है इस्तेमाल
MRI का इस्तेमाल केवल दिमाग या हड्डियों तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर पेट और पेल्विस के अंदर मौजूद अंगों की जांच के लिए भी MRI किया जा सकता है। लिवर, किडनी, पैंक्रियास और पेल्विस के कुछ अंगों में मौजूद असामान्य बदलावों को समझने में यह जांच मदद कर सकती है। कौन-सा स्कैन कराया जाए, यह मरीज के लक्षण, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर को होने वाले संदेह पर निर्भर करता है।
MRI कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखें
MRI मशीन में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल होता है। इसलिए जांच से पहले मरीज को शरीर में मौजूद मेटल इम्प्लांट, पेसमेकर, धातु के टुकड़े या किसी अन्य मेडिकल डिवाइस के बारे में डॉक्टर और MRI स्टाफ को जरूर बताना चाहिए। अगर कॉन्ट्रास्ट MRI की योजना है, तो डॉक्टर को किडनी से जुड़ी समस्या, एलर्जी या अन्य महत्वपूर्ण मेडिकल जानकारी भी बताना जरूरी है। जांच से पहले मरीज को मशीन और पूरी प्रक्रिया के बारे में स्टाफ से जानकारी ले लेनी चाहिए।
MRI हर बीमारी के लिए जरूरी नहीं
MRI एक बेहद उपयोगी इमेजिंग टेस्ट है, लेकिन हर दर्द या बीमारी में इसकी जरूरत नहीं होती। कई समस्याओं में डॉक्टर पहले शारीरिक जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या दूसरे टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसलिए खुद से MRI कराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के आधार पर जांच कराना बेहतर रहता है। सही मरीज में सही समय पर किया गया MRI बीमारी की वजह समझने और आगे के इलाज की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

