रात 2 बजे हुई बांके बिहारी की अलौकिक मंगला आरती, साल में सिर्फ एक बार ही दिखता है ये नजारा
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 11:41 AM (IST)
नारी डेस्क: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व पर वृंदावन स्थित विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शनिवार तड़के वह अलौकिक क्षण आया, जिसका इंतजार देश-दुनिया के भक्तों को पूरे साल रहता है। मंदिर में वर्ष में केवल एक बार होने वाली बांके बिहारी जी की प्रसिद्ध मंगला आरती पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की यह परंपरा बेहद अनोखी है। आम दिनों में यहां केवल श्रृंगार और राजभोग आरती ही की जाती है, मंगला आरती नहीं होती।

मान्यता है कि ठाकुर जी बाल स्वरूप में हैं और वे रात्रि में रासलीला रचाने के बाद विश्राम करते हैं, इसलिए उन्हें सुबह जल्दी नहीं जगाया जाता। हालांकि, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को कान्हा के प्राकट्य के बाद तड़के यह विशेष मंगला आरती उतारी जाती है। जन्माष्टमी की रात होने वाला दर्शन सामान्य सुबह के दर्शन से बिल्कुल अलग माना जाता है। भक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव के तुरंत बाद बालकृष्ण के रूप में दर्शन करते हैं. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्मोत्सव के बाद सेवायत गोस्वामियों द्वारा ठाकुर जी का गोपनीय महाअभिषेक किया गया। दूध, दही, देसी घी, शहद और शकर्रा (पंचामृत) के साथ-साथ दुर्लभ औषधियों से बांके बिहारी का स्नान कराया गया। इसके बाद प्रभु को सुनहरी पीतांबरी पोशाक, केसरिया वस्त्र और हीरे-माणिक्य जड़े आभूषणों से सजाया गया।

भोर के समय जैसे ही मंदिर के पट खुले और मंगला आरती शुरू हुई, पूरा प्रांगण शंखनाद, घड़यिाल की टंकार और मंजीरों की गूंज से सराबोर हो उठा। लाखों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने‘बांके बिहारी लाल की जय'और‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की'के गगनभेदी जयकारे लगाए। बांके बिहारी की एक झलक पाते ही श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे। मंगला आरती के दौरान उमड़ने वाली अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर वन-वे सिस्टम लागू किया गया और सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह होल्डिंग एरिया बनाए गए थे। आरती संपन्न होने के साथ ही अब समूचे ब्रज क्षेत्र में नंदोत्सव की धूम शुरू हो गई है।

