थायरॉइड बिगड़ने पर शरीर में दिखते हैं ये बदलाव
punjabkesari.in Tuesday, Sep 15, 2026 - 01:31 PM (IST)
नारी डेस्क: क्या आपका वजन लगातार बढ़ रहा है, जबकि आप ज्यादा खाते भी नहीं हैं और रोजाना फिजिकल एक्टिविटी भी करते हैं? अगर ऐसा है तो सिर्फ खान-पान या एक्सरसाइज को ही जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। कई बार शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी वजन बढ़ने की वजह बन सकते हैं। थायरॉइड की समस्या भी इन्हीं में से एक है। खासकर हाइपोथायरायडिज्म में शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ने लगती हैं, जिसका असर वजन के साथ-साथ एनर्जी और मूड पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या होता है हाइपोथायरायडिज्म
हाइपोथायरायडिज्म को अंडरएक्टिव थायरॉयड भी कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की थायरॉयड ग्रंथि शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त थायरॉयड हार्मोन नहीं बना पाती। थायरॉयड हार्मोन शरीर के लिए काफी जरूरी होते हैं। ये यह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं कि शरीर ऊर्जा का इस्तेमाल किस तरह करेगा। इसका असर शरीर के लगभग हर अंग पर पड़ता है, यहां तक कि दिल की धड़कन पर भी। जब शरीर में थायरॉयड हार्मोन कम बनने लगते हैं तो कई शारीरिक प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं। इसी वजह से कुछ लोगों में वजन बढ़ने की समस्या भी देखने को मिलती है।

थायरॉयड की वजह से वजन क्यों बढ़ता है
थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बेसल मेटाबॉलिज्म, शरीर की गर्मी बनाए रखने की प्रक्रिया, फैट और ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ शरीर द्वारा खर्च की जाने वाली ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। जब थायरॉयड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है तो शरीर का मेटाबॉलिक रेट भी धीमा पड़ सकता है। ऐसे में शरीर पहले की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है और कुछ लोगों में वजन बढ़ने लगता है। हालांकि, थायरॉयड की वजह से होने वाला वजन बढ़ना हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। वजन बढ़ने के पीछे डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, उम्र, दवाइयां और कई दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए केवल वजन बढ़ने के आधार पर थायरॉयड की समस्या मान लेना सही नहीं है।
किन लोगों में हाइपोथायरायडिज्म का खतरा ज्यादा हो सकता है
हाइपोथायरायडिज्म पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है। कुछ स्थितियों में इसका खतरा और बढ़ सकता है। जैसे पहले थायरॉयड से जुड़ी समस्या रही हो, जैसे घेंघा यानी Goiter।थायरॉयड की समस्या के इलाज के लिए सर्जरी या रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट हुआ हो। गर्दन या छाती के हिस्से में रेडिएशन ट्रीटमेंट लिया हो। परिवार में किसी को थायरॉयड की बीमारी रही हो। पिछले 6 महीनों में गर्भावस्था रही हो।
टर्नर सिंड्रोम जैसी जेनेटिक स्थिति हो। इसके अलावा कुछ ऑटोइम्यून और दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में भी हाइपोथायरायडिज्म का खतरा बढ़ सकता है। इनमें सीलिएक डिजीज, शोग्रेन सिंड्रोम, परनीशियस एनीमिया, टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज, रूमेटॉयड आर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी स्थितियां शामिल हैं।

सिर्फ वजन बढ़ना ही नहीं, ये लक्षण भी दिख सकते हैं
थायरॉयड हार्मोन कम होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखें, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में ये समस्याएं देखने को मिल सकती हैं
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थकान: पर्याप्त आराम करने के बाद भी लगातार थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है।
ठंड ज्यादा लगना: दूसरे लोगों के मुकाबले ठंड ज्यादा महसूस हो सकती है या ठंड बर्दाश्त करना मुश्किल लग सकता है।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: शरीर में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी या जोड़ों में परेशानी हो सकती है।
रूखी त्वचा और बालों में बदलाव: त्वचा पहले से ज्यादा ड्राई हो सकती है और बाल रूखे या पतले होने लग सकते हैं।
दिल की धड़कन धीमी होना: कुछ लोगों में हृदय की धड़कन सामान्य से धीमी हो सकती है।
मूड में बदलाव: उदासी, लो मूड या डिप्रेशन जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

कब करानी चाहिए थायरॉयड की जांच
अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के लगातार वजन बढ़ रहा है और इसके साथ थकान, ठंड ज्यादा लगना, रूखी त्वचा, बालों में बदलाव या मूड से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर थायरॉयड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। थायरॉयड की समस्या का इलाज व्यक्ति की रिपोर्ट और स्थिति के हिसाब से किया जाता है। इसलिए खुद से दवा शुरू करने या बंद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही जांच, डॉक्टर की सलाह, संतुलित डाइट और नियमित दवाओं से इस समस्या को कंट्रोल में रखा जा सकता है।

