आंखों में दिखें ये बदलाव  तो  पता चलती है ये बीमारी, न करें इग्नोर करने की गलती

punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 05:24 PM (IST)

नारी डेस्क: शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को अक्सर लोग सिर्फ थकान, कमजोरी या चक्कर आने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन लंबे समय तक एनीमिया को नजरअंदाज करना आंखों के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है और इसका असर आंखों तक पहुंच सकता है। गंभीर मामलों में रेटिना की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में बदलाव या ब्लीडिंग जैसी समस्या भी हो सकती है, जिसे एनीमिक रेटिनोपैथी (Anemic Retinopathy) कहा जाता है।

क्या है एनीमिक रेटिनोपैथी?

एनीमिक रेटिनोपैथी आंखों की एक ऐसी स्थिति है, जो गंभीर एनीमिया के साथ जुड़ी हो सकती है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा काफी कम हो जाती है तो शरीर के अलग-अलग अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। आंखों का रेटिना भी इससे प्रभावित हो सकता है। शुरुआत में एनीमिया के लक्षण सामान्य लग सकते हैं, जैसे थकान, कमजोरी, सुस्ती या चक्कर। लेकिन अगर खून की कमी ज्यादा बढ़ जाए तो आंखों की रोशनी और रेटिना से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।

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आंखों से कैसे पता चल सकता है शरीर में खून कम है?

एनीमिया होने पर आंखों के आसपास या आंखों के अंदर कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। खासकर निचली पलक को देखकर कभी-कभी शरीर में खून की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इन संकेतों पर ध्यान दें

निचली पलक का सामान्य गुलाबी रंग कम होकर बहुत हल्का या सफेद दिखाई देना। आंखों के आसपास पीलापन नजर आना। आंखों का थका हुआ और कमजोर दिखना। आंखों के नीचे डार्क सर्कल ज्यादा दिखाई देना। हालांकि सिर्फ आंखों की रंगत देखकर एनीमिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी सही जांच के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट और हीमोग्लोबिन की जांच की सलाह दे सकते हैं।

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एनीमिया बढ़ने पर आंखों से जुड़ी ये परेशानियां हो सकती हैं

अगर एनीमिया गंभीर हो जाए तो कुछ लोगों को देखने से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। जैसे धुंधला दिखाई देना। आंखों के सामने काले धब्बे या स्पॉट्स नजर आना। अचानक नजर कमजोर लगना। चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना। देखने में अचानक परेशानी होना। गंभीर मामलों में रेटिना में ब्लीडिंग, कॉटन वूल स्पॉट्स यानी रेटिना पर छोटे सफेद या पीले-सफेद धब्बे और दूसरे बदलाव भी देखे जा सकते हैं।

एनीमिक रेटिनोपैथी क्यों होती है

हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। जब हीमोग्लोबिन बहुत कम हो जाता है तो ऊतकों तक ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

आंखों में मौजूद रेटिना को भी पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है और कुछ मामलों में ब्लीडिंग या दूसरे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

क्या एनीमिक रेटिनोपैथी ठीक हो सकती है?

कई मामलों में अगर एनीमिया का समय पर पता लग जाए और उसका सही इलाज किया जाए तो आंखों से जुड़े बदलावों में सुधार हो सकता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य एनीमिया की वजह को पहचानकर हीमोग्लोबिन को सामान्य स्तर पर लाना होता है। इलाज व्यक्ति में एनीमिया के कारण और उसकी गंभीरता के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार आयरन सप्लीमेंट्स, विटामिन्स या दूसरे उपचार की सलाह दे सकते हैं। बहुत गंभीर स्थिति में अस्पताल में विशेष उपचार की जरूरत पड़ सकती है। रेटिना में ज्यादा ब्लीडिंग या गंभीर आंखों की समस्या होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ आगे के इलाज का फैसला करते हैं। इसलिए खुद से कोई दवा या सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।

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एनीमिक रेटिनोपैथी से बचने के लिए क्या करें?

एनीमिया को समय रहते पहचानना और उसका इलाज करवाना सबसे जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें:

डाइट में आयरन, फोलेट और विटामिन B12 से भरपूर चीजें शामिल करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
लगातार थकान, कमजोरी या सांस फूलने जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
जरूरत पड़ने पर हीमोग्लोबिन और दूसरे ब्लड टेस्ट करवाएं।
प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार एनीमिया की जांच करवाते रहें।
धुंधला दिखाई देना, अचानक नजर कमजोर होना या आंखों के सामने नए धब्बे दिखाई देना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर एनीमिया के साथ अचानक नजर धुंधली होने लगे, आंखों के सामने काले धब्बे बढ़ जाएं, देखने में अचानक कमी महसूस हो या आंखों से जुड़ी कोई नई और गंभीर समस्या दिखाई दे, तो इसे सिर्फ कमजोरी समझकर टालें नहीं। ऐसे लक्षणों में डॉक्टर या नेत्र रोग विशेषज्ञ से जल्द संपर्क करना जरूरी है।

एनीमिया आम समस्या हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। समय पर जांच और सही इलाज से न सिर्फ खून की कमी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि उससे जुड़ी जटिलताओं के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
  
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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