कैंसर सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं! 20-30 की उम्र में दिखें ये बदलाव तो हो जाएं सावधान
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 11:29 AM (IST)
नारी डेस्क : कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में बढ़ती उम्र की बीमारी की तस्वीर बनने लगती है। यही वजह है कि युवा उम्र में शरीर में होने वाले कई बदलावों को लोग तनाव, खराब लाइफस्टाइल, गैस या किसी सामान्य समस्या का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि कैंसर का खतरा उम्र के साथ बढ़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कम उम्र में यह हो ही नहीं सकता। इसलिए 20 या 30 की उम्र में भी अगर शरीर में कोई असामान्य बदलाव लगातार बना हुआ है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह जानना जरूरी है।
कम उम्र है तो भी लक्षणों को न करें नजरअंदाज
युवा होने पर गंभीर बीमारी की संभावना कम लग सकती है, लेकिन शरीर में लगातार बने रहने वाले किसी लक्षण को सिर्फ उम्र के आधार पर नजरअंदाज करना सही नहीं है। उदाहरण के लिए शौच के दौरान खून आना बवासीर की वजह से हो सकता है, लेकिन इसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसी तरह पेट में लगातार दर्द, बिना वजह वजन कम होना या शरीर में कोई गांठ कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। NCI के अनुसार, कैंसर के कई संभावित लक्षण आम बीमारियों, चोट या अन्य गैर-कैंसर कारणों से भी हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई लक्षण कुछ हफ्तों तक ठीक न हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
शरीर में दिखें ये बदलाव तो रहें सतर्क
कुछ ऐसे बदलाव हैं जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें शामिल हैं
शरीर में नई गांठ या सूजन, जो बनी रहे
बिना किसी स्पष्ट वजह के वजन कम होना
मल या पेशाब में असामान्य खून आना
लंबे समय तक खांसी या आवाज में बदलाव
ऐसा घाव जो ठीक न हो
बार-बार या लगातार पेट की परेशानी
शौच या पेशाब की आदत में अचानक बदलाव
लंबे समय तक रहने वाली अत्यधिक थकान
बिना स्पष्ट कारण लगातार बुखार या रात में ज्यादा पसीना आना
मुंह में ऐसा छाला या लाल-सफेद पैच जो ठीक न हो
इनमें से किसी एक लक्षण का मतलब कैंसर होना नहीं है। लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है या कई हफ्तों से बनी हुई है, तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा सही है।
हर गांठ या खून आना कैंसर नहीं
कैंसर से जुड़े लक्षणों को पढ़कर घबराने की जरूरत नहीं है। शरीर में गांठ होने के कई गैर-कैंसर कारण हो सकते हैं और शौच में खून आने की वजह बवासीर जैसी सामान्य समस्या भी हो सकती है। इसी तरह लगातार खांसी कई अन्य कारणों से भी हो सकती है। इसलिए किसी लक्षण को देखकर खुद ही कैंसर मान लेना भी सही नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि असामान्य और लगातार बने लक्षण की सही वजह पता की जाए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच, टेस्ट या आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
तनाव और बिजी लाइफस्टाइल के बीच सेहत न भूलें
आजकल युवाओं की दिनचर्या काफी व्यस्त है। देर रात तक काम करना, लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना और अनियमित खान-पान आम हो गया है। तनाव और नींद की कमी को सीधे कैंसर का कारण मानना सही नहीं है, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग अपनी सेहत और शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज जरूर कर सकते हैं। वहीं, तंबाकू, शराब, अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और अस्वस्थ खान-पान जैसे कारक कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं। WHO के अनुसार तंबाकू, शराब, अधिक BMI, कम शारीरिक गतिविधि और फल-सब्जियों का कम सेवन कैंसर के कुछ प्रमुख रोकथाम योग्य जोखिम कारकों में शामिल हैं।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
अगर शरीर में कोई नया या असामान्य बदलाव लगातार कुछ हफ्तों तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या समय के साथ बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से मिलना चाहिए। खासकर बिना वजह वजन कम होना, असामान्य ब्लीडिंग, लगातार गांठ, लंबे समय तक खांसी, न भरने वाला घाव या आंत और पेशाब की आदत में अचानक बदलाव को टालना ठीक नहीं है।
नोट: कैंसर को लेकर डरने के बजाय जागरूक रहना ज्यादा जरूरी है। हर लक्षण कैंसर नहीं होता, लेकिन शरीर के लगातार दिए जा रहे संकेतों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। समय पर डॉक्टर से सलाह और जरूरत के अनुसार जांच कराना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

