Power Nap कितनी देर की होनी चाहिए? 10, 20 या 30 मिनट, जानें सही तरीका
punjabkesari.in Tuesday, Sep 22, 2026 - 11:00 AM (IST)
नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद पूरी करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऑफिस का काम, पढ़ाई और लगातार बदलती दिनचर्या के बीच कई बार रात की नींद पूरी नहीं हो पाती। इसका असर अगले दिन साफ दिखाई देता है। आंखों में नींद, शरीर में थकान और काम पर ध्यान लगाने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में दिन के बीच में ली गई छोटी-सी झपकी काफी मदद कर सकती है। इसे Power Nap कहा जाता है। लेकिन सवाल है कि आखिर पावर नैप कितनी देर की होनी चाहिए? 10, 20 या 30 मिनट की झपकी में क्या फर्क है और ज्यादा देर सोने से क्या नुकसान हो सकता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Power Nap क्या होती है
पावर नैप दिन में थोड़े समय के लिए ली जाने वाली छोटी झपकी है। इसका मकसद लंबे समय तक सोना नहीं, बल्कि थोड़ी देर आराम करके थकान और नींद को कम करना होता है। दोपहर में काम करते समय अगर आपको अचानक सुस्ती महसूस होने लगे या आंखें भारी होने लगें, तो थोड़ी देर की नैप शरीर और दिमाग को आराम देने में मदद कर सकती है। इससे जागने के बाद व्यक्ति खुद को ज्यादा फ्रेश महसूस कर सकता है और काम पर ध्यान लगाने में भी आसानी हो सकती है। हालांकि, हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में सोना जरूरी नहीं है। अगर रात में आपकी नींद पूरी और अच्छी हो रही है, तो दिन में नैप लेने की जरूरत महसूस नहीं भी हो सकती।

10 मिनट की नैप कैसी रहती है
अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो 10 मिनट की छोटी झपकी भी आराम देने वाली हो सकती है। खासकर तब, जब आप काम के बीच बहुत ज्यादा थकान या नींद महसूस कर रहे हों। इतने कम समय में आमतौर पर गहरी नींद में जाने की संभावना कम रहती है, इसलिए जागने के बाद भारीपन महसूस होने की संभावना भी कम हो सकती है। ऑफिस में लंच ब्रेक के दौरान थोड़ी देर आंखें बंद करके आराम करना भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
20 मिनट की Power Nap क्यों मानी जाती है अच्छी
अगर आप दिन में नैप लेना चाहते हैं, तो 15 से 20 मिनट की झपकी एक व्यावहारिक विकल्प मानी जाती है। इतनी देर आराम करने से थकान कम करने, सतर्कता बढ़ाने और काम पर दोबारा ध्यान लगाने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से इसे Power Nap कहा जाता है। खासकर ऑफिस या पढ़ाई के दौरान जब दोपहर में सुस्ती आने लगे, तब 15-20 मिनट की नैप के बाद व्यक्ति खुद को ज्यादा तरोताजा महसूस कर सकता है।

30 मिनट की नैप में क्या होता है
30 मिनट की झपकी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसमें एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। आधे घंटे तक सोने पर आप थोड़ी गहरी नींद की तरफ जा सकते हैं। ऐसे में जागने के तुरंत बाद कुछ लोगों को सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है। इसे Sleep Inertia कहा जाता है। यानी सोकर उठने के बाद कुछ समय तक दिमाग पूरी तरह एक्टिव महसूस नहीं करता। हालांकि, कुछ शोधों में लगभग 30 मिनट की झपकी लेने वाले लोगों में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता से जुड़े कुछ फायदे भी देखे गए हैं। इसलिए नैप का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता।
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60 से 90 मिनट की नींद कब ली जा सकती है
अगर किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त समय है और उसे लंबी नैप की जरूरत महसूस हो रही है, तो 60 से 90 मिनट की नींद में शरीर नींद के गहरे चरणों तक पहुंच सकता है। ऐसी नींद कुछ लोगों के लिए मानसिक और शारीरिक आराम दे सकती है। लेकिन लंबी नैप के बाद जागने पर सुस्ती महसूस हो सकती है। साथ ही, अगर इसे दिन में बहुत देर से लिया जाए या जरूरत से ज्यादा सोया जाए, तो रात की नींद पर भी असर पड़ सकता है।

तो 10, 20 या 30 मिनट में क्या चुनें
अगर आपका मकसद सिर्फ दिन की थकान और सुस्ती कम करके दोबारा काम पर ध्यान लगाना है, तो 15 से 20 मिनट की Power Nap सबसे आसान विकल्प हो सकती है। 10 मिनट की झपकी तब ठीक है जब समय बहुत कम हो, जबकि 30 मिनट की नैप कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन उठने के बाद थोड़ी देर सुस्ती रह सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि Power Nap रात की पूरी नींद का विकल्प नहीं है। अगर आपको रोज दिन में बहुत ज्यादा नींद आती है, रात में पर्याप्त समय सोने के बावजूद थकान रहती है या नींद से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है, तो इसके पीछे किसी अन्य कारण को समझने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

