किताबें न लाने पर टीचर ने बच्ची को धूप में खड़ा किया, तबीयत बिगड़ने के बाद हुई मौत

punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 12:26 PM (IST)

नारी डेस्क : दिल्ली के पूर्वी विनोद नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 10 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। परिवार ने आरोप लगाया है कि बच्ची को स्कूल में किताबें न लाने पर सजा के तौर पर तेज धूप में खड़ा किया गया था। तबीयत बिगड़ने के बाद बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की जांच पूरी होने तक दिल्ली सरकार ने संबंधित शिक्षिका का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह कदम जांच को निष्पक्ष और बिना किसी हस्तक्षेप के पूरा कराने के लिए उठाया गया है।

किताब न लाने पर धूप में खड़ा करने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, घटना 27 अगस्त को पूर्वी विनोद नगर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में हुई। परिवार का आरोप है कि बच्ची किताबें लेकर स्कूल नहीं गई थी, जिसके बाद एक शिक्षिका ने उसे सजा के तौर पर धूप में खड़ा कर दिया। बच्ची की मां अंजलि के मुताबिक, स्कूल से तबीयत खराब होने की सूचना मिलने के बाद वह वहां पहुंचीं। उनका आरोप है कि स्कूल पहुंचने पर उन्होंने अपनी बेटी को धूप में खड़ा पाया और उसकी हालत काफी खराब थी।

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अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

परिवार के अनुसार, बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 27 अगस्त को उसकी मौत हो गई। हालांकि, बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच का विषय है। पुलिस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद बच्ची के परिवार और स्थानीय लोगों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले स्कूल कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

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जांच पूरी होने तक शिक्षिका का तबादला

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि छात्रा की मौत की जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने तक संबंधित शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके और किसी तरह का हस्तक्षेप न हो। फिलहाल पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


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Monika

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