कुत्ते के चाटने से महिला को हुआ खतरनाक इंफेक्शन, काटने पड़े हाथ और पैर
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 07:47 PM (IST)
नारी डेस्क: UK में 52 साल की एक महिला, मंजीत संघा को सेप्सिस होने के बाद चार अंग काटने पड़े। बताया जा रहा है कि यह तब हुआ जब उनके कुत्ते ने एक छोटा सा कट या खरोंच चाटा। थोड़ी सी तबीयत खराब होने से शुरू हुआ मामला कुछ ही घंटों में बढ़ गया। अगली सुबह तक वह बेहोश हो गईं, उनके हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे हो गए थे होंठ बैंगनी हो गए थे, और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

दोनों पैर और दोनों हाथ काटने पड़े
मंजीत संघा का वॉल्वरहैम्प्टन के न्यू क्रॉस हॉस्पिटल में इंटेंसिव केयर में भर्ती कराया गया, उन्हें कई बार कार्डियक अरेस्ट हुआ, और आखिर में इन्फेक्शन फैलने की वजह से घुटने के नीचे दोनों पैर और दोनों हाथ काटने पड़े। डॉक्टरों को शक है कि कैपनोसाइटोफेगा कैनिमोरसस, जो आमतौर पर कुत्ते की लार में पाया जाने वाला बैक्टीरिया है, टूटी हुई स्किन के ज़रिए उनके ब्लडस्ट्रीम में चला गया। इस मामले ने सेप्सिस को फिर से फोकस में ला दिया है।
इन्फेक्शन सेप्सिस में कैसे बदलते हैं
डॉक्टर बताते हैं कि सेप्सिस इन्फेक्शन के प्रति शरीर का बहुत ज़्यादा रिएक्शन है। एक बार जब बैक्टीरिया ब्लडस्ट्रीम में चले जाते हैं, तो वे बड़े पैमाने पर सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे टिशू डैमेज और ऑर्गन डिस्फंक्शन हो सकते हैं। सांघा जैसे मामलों में, जानवरों की लार से बैक्टीरिया छोटे-मोटे घावों से भी अंदर जा सकते हैं। पालतू जानवरों में नुकसान न पहुंचाने वाले, कैपनोसाइटोफेगा कैनिमोरसस जैसे पैथोजन्स इंसानों में खतरनाक हो सकते हैं, खासकर अगर इम्यूनिटी कमज़ोर हो।

सेप्सिस के शुरुआती लक्षण
तेज बुखार या बहुत कम तापमान: बहुत तेज बुखार आना, या उल्टा शरीर का तापमान असामान्य रूप से कम हो जाना।
तेज धड़कन और तेज सांस: दिल की धड़कन सामान्य से तेज हो जाए या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो।
बहुत ज्यादा कमजोरी या सुस्ती: अचानक से अत्यधिक थकान, चक्कर, या उठने-बैठने में कमजोरी।
मानसिक भ्रम (कन्फ्यूजन): अचानक उलझन, बात समझने में दिक्कत, या सामान्य व्यवहार में बदलाव। बुजुर्गों में यह एक बड़ा संकेत हो सकता है।
पेशाब कम आना: किडनी पर असर का संकेत हो सकता है।
ठंडी, पीली या नीली त्वचा: हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना या त्वचा का रंग बदलना।
गंभीर संकेत (इमरजेंसी स्थिति)
ब्लड प्रेशर बहुत कम होना, सांस लेने में गंभीर तकलीफ, बेहोशी या प्रतिक्रिया न देना, शरीर पर लाल चकत्ते जो दबाने पर फीके न पड़ें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं। सेप्सिस में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसका बुजुर्ग और छोटे बच्चे, डायबिटीज, कैंसर या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, हाल ही में सर्जरी या गंभीर चोट वाले मरीजों लं औरबे समय से अस्पताल में भर्ती मरीजों को ज्यादा खतरा होता है। याद रखें समय पर इलाज से सेप्सिस पूरी तरह ठीक हो सकता है, लेकिन देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

