2-3 घंटे लगातार मोबाइल देखे तो यह बीमारी का खतरा
punjabkesari.in Monday, Jul 13, 2026 - 01:15 PM (IST)
नारी डेस्क: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक कई लोग लगातार मोबाइल स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। ऑफिस का काम, पढ़ाई, ऑनलाइन पेमेंट, सोशल मीडिया, मनोरंजन और खरीदारी जैसी जरूरतों के लिए मोबाइल पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। हालांकि, सुविधा देने वाला यही मोबाइल अगर जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो यह धीरे-धीरे हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर जब कोई व्यक्ति रोजाना कई घंटे लगातार स्क्रीन देखता है, तो आंखों, नींद, शरीर की मुद्रा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
आंखों पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन, लालिमा, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लगातार स्क्रीन देखने की आदत से डिजिटल आई स्ट्रेन का खतरा भी बढ़ जाता है। स्क्रीन देखते समय 20-20-20 नियम अपनाएं। यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। मोबाइल की ब्राइटनेस जरूरत के हिसाब से रखें। रात में ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें।

गर्दन, कंधे और कमर में बढ़ सकता है दर्द
मोबाइल चलाते समय अक्सर लोग सिर झुकाकर लंबे समय तक बैठे रहते हैं। इस गलत पोस्चर की वजह से गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने से टेक्स्ट नेक जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें गर्दन में दर्द और अकड़न महसूस होती है। मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखकर इस्तेमाल करें। हर 30-40 मिनट में थोड़ा ब्रेक लें। गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करते रहें।
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खराब हो सकती है नींद की गुणवत्ता
कई लोगों की आदत होती है कि वे सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल चलाते रहते हैं। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित कर सकती है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस वजह से नींद आने में परेशानी, बार-बार नींद खुलना और सुबह उठने के बाद थकान महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम कर दें। बेडरूम में मोबाइल रखने की आदत को सीमित करें।
बढ़ सकता है तनाव और चिंता का खतरा
मोबाइल सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना और दूसरों की जिंदगी से तुलना करना तनाव, चिंता और मूड में बदलाव का कारण बन सकता है। कई लोगों को मोबाइल न मिलने पर बेचैनी महसूस होने लगती है, जो डिजिटल निर्भरता का संकेत हो सकता है। सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का समय तय करें। समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं। परिवार और दोस्तों के साथ ऑफलाइन समय बिताएं।

ध्यान और याददाश्त पर भी पड़ सकता है असर
हर कुछ मिनट में मोबाइल चेक करने की आदत दिमाग की एकाग्रता को कम कर सकती है। बार-बार मिलने वाले नोटिफिकेशन ध्यान भटकाते हैं, जिससे पढ़ाई, काम और रोजमर्रा के जरूरी कामों पर असर पड़ सकता है। काम या पढ़ाई के समय नोटिफिकेशन बंद रखें। फोकस करने के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर काम करने की आदत डालें।
कम हो जाती है शारीरिक गतिविधि
ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने से लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं और शरीर की गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसका असर वजन बढ़ने, मोटापे, डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे के रूप में दिखाई दे सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या वॉक करें। लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने के बीच उठकर थोड़ा चलें। स्क्रीन टाइम के साथ फिजिकल एक्टिविटी का संतुलन बनाए रखें। मोबाइल छोड़ना नहीं, सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी

स्मार्टफोन आज की जरूरत है और इससे पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है। लेकिन इसका इस्तेमाल कितना और कैसे किया जाए, यह हमारी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना, बीच-बीच में ब्रेक लेना और स्वस्थ आदतें अपनाना मोबाइल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।

