गोविंदा की पत्नी सुनीता आहुजा ने इन बीमारियों के कारण छोड़ा 'Lock Upp 2', खुद बताई वजह
punjabkesari.in Monday, Jul 13, 2026 - 10:17 AM (IST)
नारी डेस्क: बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहुजा ने रियलिटी शो 'लॉक अप 2' को बीच में ही अलविदा कह दिया है। शो से बाहर आने के बाद उन्होंने साफ किया कि यह फैसला किसी विवाद या असहमति की वजह से नहीं, बल्कि लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण लिया गया। सुनीता ने बताया कि शुरुआत में वह यह जानना चाहती थीं कि रियलिटी शो का अनुभव कैसा होता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उनके लिए शो में बने रहना संभव नहीं था।
होस्ट्स के सामने बयां किया अपना दर्द
शो से बाहर निकलने से पहले सुनीता ने होस्ट फराह खान और रितेश देशमुख से अपनी परेशानी साझा की। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यह अनुभव लेना चाहती थीं कि रियलिटी शोज कैसे होते हैं, लेकिन अब उनकी तबीयत उनका साथ नहीं दे रही। सुनीता ने बताया कि उनकी डायबिटीज नियंत्रण में नहीं है, मेनोपॉज की वजह से उन्हें एंजायटी महसूस हो रही है। इसके अलावा उन्हें सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ भी हो रही है। इन सभी कारणों से उन्होंने शो से बाहर जाने की अनुमति मांगी और कहा कि वह अब घर लौटना चाहती हैं।
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Sunita Ahuja EVICTED from Lockupp Season 2 due to health issues ! 🚩
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गोविंदा और बेटी टीना लेने पहुंचे घर
सुनीता के शो छोड़ने के फैसले के बाद उनके पति गोविंदा और बेटी टीना आहुजा सेट पर पहुंचे। दोनों ने होस्ट्स के साथ मिलकर सुनीता का स्वागत किया और उन्हें अपने साथ घर ले गए। इस दौरान परिवार ने उनकी सेहत को प्राथमिकता देने का फैसला किया।
59 साल की उम्र में किन स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ जाता है खतरा
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहुजा ने इन बीमारियों के कारण छोड़ा 'Lock Upp 2', खुद बताई वजह
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सुनीता आहुजा की उम्र 59 वर्ष है। इस उम्र में महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव आते हैं, जिनके कारण विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मेनोपॉज के दौरान बढ़ सकती हैं ये परेशानियां
आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच महिलाओं में मेनोपॉज की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान मासिक धर्म बंद हो जाता है और शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इसके कारण हॉट फ्लैशेज, रात में अधिक पसीना आना, नींद न आना (इंसोमनिया), मूड स्विंग्स, वैजाइनल ड्राइनेस और एंजायटी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं।
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हड्डियां हो सकती हैं कमजोर
बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं की बोन डेंसिटी कम होने लगती है। इसका असर हड्डियों की मजबूती पर पड़ता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हल्की चोट भी फ्रैक्चर की वजह बन सकती है।
दिल की बीमारियों का भी बढ़ जाता है जोखिम
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा पहले की तुलना में अधिक हो जाता है। हार्मोनल बदलावों के कारण हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए इस उम्र में नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी मानी जाती है।
डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याएं भी बन सकती हैं चुनौती
बढ़ती उम्र के साथ शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यदि पहले से डायबिटीज हो, तो उसे नियंत्रित रखना और भी जरूरी हो जाता है।
यूरिनरी समस्याओं को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों के अनुसार इस उम्र में महिलाओं को बार-बार पेशाब आना, यूरिन इंफेक्शन या पेशाब से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। कई बार ये लक्षण किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

