डिलीवरी के साथ भी और बाद भी खूब परेशान करती है ये बीमारी, हर महिला को होनी चाहिए इसकी जानकारी

punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 04:36 PM (IST)

नारी डेस्क:  गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, हाल ही में एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि बच्चे को जन्म देने के 14 साल बाद तक भी महिलाओं में उच्च रक्तचाप के विकास का जोखिम बना रहता है। हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग के लिए एक जोखिम कारक है, जो मृत्यु का प्रमुख कारण है। यह खबर खासकर उन महिलाओं के लिए है जो मां बनी चुकी हैं। 


क्या है  HDP

हाइपरटेंशन जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन प्रसवोत्तर महिलाओं के एक समूह पर केंद्रित है, जिनका गर्भावस्था के दौरान एचडीपी विकसित हुआ था। दरअसल HDP (Hypertensive Disorders of Pregnancy) का मतलब गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों से है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है और इसे समय रहते कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है। गर्भावस्था में (HDP) एक गंभीर समस्या हो सकती है यह जीवन में बाद में हृदय रोग के जोखिमों को बढ़ा देती है। 

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14 साल तक महिलाओं का रिकॉर्ड किया ट्रैक 

अमेरिका में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने पाया कि जिन महिलाओं में गर्भावस्था के पहले 20 हफ्तों के दौरान कुछ खास रक्तचाप पैटर्न दिखाई देते हैं, उनमें बाद में जीवन में उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना अधिक होती है। अध्ययन में 174,774 महिलाओं का अनुसरण किया गया,इनमें से किसी भी महिला को गर्भावस्था से पहले उच्च रक्तचाप, किडनी, लीवर या हृदय रोग या प्रीक्लेम्पसिया का इतिहास नहीं था। शोधकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप के नए मामलों की पहचान करने के लिए प्रसव के 14 साल बाद तक उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को ट्रैक किया।  शोधकर्ताओं ने उच्च जोखिम वाली महिलाओं की पहचान करने, लक्षित निगरानी और प्रारंभिक हस्तक्षेप की पेशकश करने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में हृदय संबंधी समस्याओं को रोका जा सके।


गर्भावस्था में होने वाले हाइपरटेंशन के प्रकार 

सबसे पहला होता है जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (Gestational Hypertension) जो प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते के बाद होता है। इसमें पेशेंट को सिर्फ हाई बीपी की समस्या होती है, लेकिन पेशाब में प्रोटीन नहीं पाया जाता। अधिकतर मामलों में यह डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है। दूसरा है  प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia) यह गर्भावस्था के 20 हफ्तों के बाद होता है और यह गंभीर स्थिति हो सकती है।  यह किडनी, लिवर और हृदय को प्रभावित कर सकता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, शरीर में सूजन और उल्टी शामिल हो सकते हैं।   जो महिलाएं गर्भधारण से पहले ही हाई ब्लड प्रेशर की मरीज  होती हैं, उन्हें क्रॉनिक हाइपरटेंशन (Chronic Hypertension) की समस्या होती है यह अधिक गंभीर हो सकता है और गर्भपात (Miscarriage) का खतरा बढ़ा सकता है।  
 

 गर्भावस्था में हाई बीपी होने के कारण

-पहली बार गर्भधारण करना
-परिवार में हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया का इतिहास  
-अत्यधिक मोटापा या वजन बढ़ना
-जुड़वा या अधिक बच्चों की प्रेग्नेंसी
-गर्भावस्था के बीच में डायबिटीज़ या किडनी रोग का होना  
-धूम्रपान और शराब का सेवन

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प्रसव के बाद हाई ब्लड प्रेशर क्यों बना रहता है?


कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर होता है, जिसे जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है।प्रसव के बाद हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) में बड़े बदलाव आते हैं, जो ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चे की देखभाल, नींद की कमी और जिम्मेदारियों का बढ़ना महिलाओं को मानसिक तनाव देता है, जो हाई बीपी को बढ़ा सकता है। प्रेग्नेंसी के बाद वजन कम न होने से मोटापा और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। वहीं  असंतुलित खानपान, शारीरिक सक्रियता की कमी, अधिक नमक का सेवन भी हाई बीपी का कारण बन सकता है। अगर हाई बीपी लंबे समय तक बना रहता है, तो यह किडनी और हृदय पर दबाव डाल सकता है, जिससे यह समस्या क्रॉनिक बन सकती है।


 इसे कंट्रोल करने के लिए क्या करें?

-नियमित ब्लड प्रेशर की जांच करें  
-कम नमक वाला संतुलित आहार ले
-ज्यादा पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें  
-नियमित हल्की एक्सरसाइज और योग करें
-तनाव से बचें और अच्छी नींद लें
डॉक्टर के बताए अनुसार दवाएं लें


नोट: गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर (HDP) एक गंभीर समस्या हो सकती है, लेकिन समय पर सही देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आपको या किसी जानने वाले को यह समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। 
 


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Content Writer

vasudha

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