14 साल की उम्र में बनाया असली हवाई जहाज, जानें कोन है ''सबरीना पास्टर्स्की''
punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 04:09 PM (IST)
नारी डेस्क : दुनिया जहां शोहरत और स्टार्टअप्स के पीछे भाग रही है, वहीं एक महिला चुपचाप ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्यों को समझने में जुटी है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा अपनी पीढ़ी की सबसे विलक्षण प्रतिभाओं में गिनी जाने वाली 32 वर्षीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी सबरीना गोंजालेज पास्टर्स्की को कई लोग “नेक्स्ट आइंस्टीन” कह रहे हैं। सबरीना न तो लाइमलाइट चाहती हैं और न ही अरबों कमाने की होड़ में हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ एक है। यह समझना कि ब्रह्मांड आखिर काम कैसे करता है।
14 साल की उम्र में बनाया असली हवाई जहाज
सबरीना की प्रतिभा बचपन से ही अलग थी। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने बिल्कुल शुरुआत से एक असली हवाई जहाज खुद डिजाइन कर बनाया। इसी प्रक्रिया में उन्होंने इंजीनियरिंग, एयरोडायनामिक्स और फिजिक्स को किताबों से नहीं, बल्कि प्रयोगों से सीखा।16 की उम्र में अकेले उड़ाया विमान। जहां इस उम्र में बच्चे गाड़ी चलाना सीखते हैं, वहीं सबरीना ने खुद बनाए विमान को अकेले उड़ाया। न कोई ट्रेनर, न कोई सुरक्षा कवच सिर्फ विज्ञान पर भरोसा।
MIT ने पहले ठुकराया, फिर बुलाया
जब सबरीना ने MIT में आवेदन किया, तो उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। अच्छे नंबर थे, लेकिन कोई अवॉर्ड या पहचान नहीं। उन्होंने बहस नहीं की बस MIT को अपने विमान उड़ाने का वीडियो भेज दिया। जवाब में MIT ने सिर्फ एक सवाल पूछा, क्या आप अगले सेमेस्टर से जॉइन कर सकती हैं?
यें भी पढ़ें : ठंड में हार्ट अटैक आने की 4 बड़ी वजहें, सर्दियों में दिल क्यों हो जाता है कमजोर?
तीन साल में टॉप ग्रेजुएशन
सबरीना ने MIT से पूरे अंक हासिल करते हुए ग्रेजुएशन पूरी की। प्रोफेसर्स उन्हें दशकों में देखी गई सबसे बेहतरीन छात्राओं में से एक बताते हैं। बिना शोर, बिना प्रचार, सिर्फ नतीजे।

अरबों के ऑफर ठुकराए
जेफ बेजोस, गूगल और फेसबुक जैसे दिग्गजों ने उन्हें ऑफर दिए, लेकिन सबरीना ने साफ कहा, मैं अरबपतियों को और अमीर नहीं बनाना चाहती, मैं ब्रह्मांड को समझना चाहती हूं।
यें भी पढ़ें : ‘धुरंधर’ का टाइटल ट्रैक NBA मैच में गूंजा, अमेरिकी स्टेडियम में दिखा देसी तड़का
आज क्या कर रही हैं सबरीना?
आज सबरीना क्वांटम ग्रैविटी, ब्लैक होल और स्पेसटाइम की संरचना पर रिसर्च कर रही हैं। महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग उनके काम का हवाला दे चुके हैं। जहां दुनिया दिखावे में व्यस्त है, वहीं सबरीना पास्टर्स्की साबित कर रही हैं कि हर क्रांति शोर नहीं मचाती। कुछ बदलाव खामोशी से होते हैं और वही मानवता की सोच बदल देते हैं।

