आखिर कैसे गधा बना माता शीतला का वाहन? जानें इसके पीछे की वजह

punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 05:10 PM (IST)

नारी डेस्क : शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला गधे की सवारी करती हैं। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर गधा ही माता शीतला का वाहन क्यों बना? इसके पीछे भी एक पौराणिक और प्रतीकात्मक कारण बताया गया है। सनातन धर्म में देवी-देवताओं के कई रूपों का वर्णन मिलता है और लगभग हर देवी-देवता की अपनी एक अलग सवारी होती है। कोई देवी शेर पर सवार होती हैं, तो कोई हाथी या उल्लू पर। इसी तरह माता शीतला की सवारी गधा मानी जाती है, जो धैर्य, सहनशीलता और मेहनत का प्रतीक है।

कौन हैं माता शीतला?

हिंदू धर्म में माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। खासकर चेचक और त्वचा से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से रोग-व्याधियों से मुक्ति मिलती है और परिवार स्वस्थ रहता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि को माता शीतला की पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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कैसा है माता शीतला का स्वरूप?

धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण के अनुसार माता शीतला गधे पर सवार होती हैं। उनके हाथों में कलश, सूप और झाड़ू होते हैं और वे नीम के पत्तों की माला धारण करती हैं। माता का यह स्वरूप स्वच्छता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का संदेश देता है।

माता शीतला की सवारी गधा ही क्यों?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गधा एक बहुत ही सहनशील और मेहनती जानवर होता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत मानी जाती है, यानी वह जल्दी बीमार नहीं पड़ता। माता शीतला जी को रोगों को दूर करने वाली देवी माना जाता है। इसलिए उनकी सवारी के रूप में गधे को प्रतीक के तौर पर चुना गया। हमें यह संदेश देता है कि धैर्य, सहनशीलता और मेहनत से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

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माता के हाथ में झाड़ू और कलश क्यों होते हैं?

माता शीतला के हाथ में झाड़ू होना सफाई और स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है। जहां स्वच्छता होती है, वहां बीमारियां कम फैलती हैं। इसलिए झाड़ू नकारात्मकता और रोगों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है वहीं माता के हाथ में जल से भरा कलश होता है, जो शुद्धता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। जल ठंडक और संतुलन का भी संकेत देता है।

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नीम की माला क्यों पहनती हैं माता?

नीम को आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने और रोगों से लड़ने में मदद करता है। माता शीतला के गले में नीम की माला इस बात का संकेत देती है कि प्रकृति के करीब रहकर और स्वच्छता अपनाकर हम कई बीमारियों से बच सकते हैं।

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माता शीतला की पूजा का महत्व

माता शीतला की पूजा विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन की जाती है। इस दिन माता को ठंडे और बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे बसौड़ा भी कहा जाता है। मान्यता है कि ठंडा और बासी भोजन माता को अर्पित करने से वे प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों और संक्रमण से बचाती हैं। इसलिए यह पर्व आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी देता है।


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Monika

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