सड़कों पर भीख मांगने वाला निकला करोड़पति,  बड़े- बड़े व्यापारी उससे लेते हैं कर्ज

punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 10:21 AM (IST)

सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने की प्रथा को खत्म करने के लिए इंदौर में मिशन "भिखारी-मुक्त इंदौर" चलाया जा रहा है।  इस मिशन का मुख्य उद्देश्य केवल सड़कों से बेसहारा या भिखारी लोगों को हटाना नहीं , बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन की ओर ले जाना था। रोज़गार, स्किल ट्रेनिंग और काम उपलब्ध कराने के मसकद से चल रहे इस मिशन के दौरान एक ऐसा व्यक्ति सामने आया बॉल-बेयरिंग पहियों वाली एक स्लाइडिंग लोहे की गाड़ी पर बैठकर करोड़ों कमा रहा था।


दिन में 500 से 1,000 रुपये कमाता था भिखारी

शारीरिक रूप से विकलांग मांगीलाल सालों से शहर के मशहूर सराफा बाजार इलाके में एक जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। उन्होंने कभी "भीख" नहीं मांगी, कम से कम खुलेआम तो नहीं। वह एक कोने में बैठते थे या बैकपैक पहनकर घूमते थे, अपने हाथों को जूतों के अंदर डालकर खुद को आगे बढ़ाते थे। उनकी ऐसी हालत देखकर , राहगीर उसकी हथेली में कैश या सिक्के रख देते थे। एक आम दिन की कमाई 500 से 1,000 रुपये के बीच होती थी।


तीन ऑटो-रिक्शा का मालिक है भिखारी

जब MP के महिला और बाल विकास विभाग की एक रेस्क्यू टीम ने हाल ही में मंगिलाल को उठाया और उसे बताया कि उसे रिहैबिलिटेट किया जाएगा, तो सच्चाई सामने आ गई। मंगिलाल ने नोडल ऑफिसर दिनेश मिश्रा को बताया कि उसके पास भगत सिंह नगर में तीन मंज़िला घर, शिव नगर में 600 वर्ग फुट का घर और अलवासा में एक बेडरूम का फ्लैट है, जो उसे रेड क्रॉस सोसाइटी के ज़रिए PMAY योजना के तहत उसकी विकलांगता के आधार पर मिला है। उसके पास तीन ऑटो-रिक्शा भी हैं, जिन्हें वह किराए पर देता है, और एक स्विफ्ट डिज़ायर कार है जिसके ड्राइवर को वह सैलरी देता है।


ब्याज पर भी देता है पैसा

 शारीरिक रूप से विकलांग मंगिलाल भी मिलने वाली "भीख" का इस्तेमाल सराफा बाज़ार में छोटे ज्वेलरी बिज़नेस पर फोकस करके ज़्यादा ब्याज पर पैसे उधार देने के धंधे में करता है। वह जिन लोगों को पैसे उधार देता है, उनसे रोज़ाना या हफ़्ते में ब्याज वसूलता है। अधिकारियों ने सोमवार को वेरिफिकेशन के लिए मंगिलाल के बैंक खातों और दूसरी कैश होल्डिंग्स की एक लिस्ट तैयार की है।  मंगिलाल फिलहाल अपने माता-पिता के साथ अलवासा फ्लैट में रहता है। उसके दो भाई अलग रहते हैं। इंदौर की सड़कों से भिखारियों को हटाने का अभियान फरवरी 2024 में शुरू हुआ था। इस काम में शामिल अलग-अलग एजेंसियों ने सिर्फ़ दो सालों में लगभग 6,500 भिखारियों की पहचान की है और उनमें से 4,500 को राज्य सरकार की योजनाओं के ज़रिए रोज़ी-रोटी कमाने के लिए काउंसलिंग दी है। लगभग 1,600 "बचाए गए" भिखारियों को उज्जैन के एक आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया है। इस प्रोग्राम ने 172 बच्चों को स्कूलों में एडमिशन दिलाने में भी मदद की है।
 


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vasudha

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