कुंडली का बहाना बनाकर शादी से इंकार करने वालों की खैर नहीं, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 10:41 AM (IST)

नारी डेस्क: शादी के भरोसे के आधार पर फिजिकल रिलेशन बनाने के बाद 'कुंडली' (राशिफल) के मेल न खाने की वजह से शादी से मना करने पर भारतीय न्याय संहिता का सेक्शन 69 लग सकता है, जो धोखे से सेक्सुअल इंटरकोर्स को अपराध मानता है, दिल्ली हाई कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह बात एक ऐसे आदमी को बेल देने से मना करते हुए कही, जिस पर एक औरत के साथ फिजिकल रिलेशन बनाने और बाद में इस आधार पर उससे शादी करने से मना करने का आरोप था कि उनकी जन्म-कुंडली मैच नहीं करती थी। 


आरोपी ने बहाना मारकर तोड़ा रिश्ता

जज ने कहा कि आरोपी ने प्रॉसिक्यूटर को बार-बार भरोसा दिलाया कि उनकी शादी में कोई रुकावट नहीं है, जिसमें 'कुंडली' मैचिंग भी शामिल है, और इसलिए इस स्टेज पर उसके बर्ताव पर BNS के सेक्शन 69 के तहत जुर्म बनता है। आरोपी जो 4 जनवरी से ज्यूडिशियल कस्टडी में है ने इस आधार पर बेल मांगी कि रिश्ता आपसी सहमति से था, और दोनों एक-दूसरे को आठ साल से जानते थे। उसके वकील ने कहा कि शादी का झूठा बहाना बनाकर रेप करने का मामला नहीं बनता और उसे रेगुलर बेल मिलनी चाहिए।


कोर्ट ने दिया ये आदेश

17 फरवरी को दिए गए अपने ऑर्डर में, कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूटर ने पहली शिकायत नवंबर 2025 में दर्ज कराई थी, लेकिन आरोपी और उसके परिवार द्वारा कथित तौर पर दिए गए शादी के भरोसे पर ही वापस ले ली गई थी, और बाद में 'कुंडली' न मिलने के आधार पर शादी करने से मना कर दिया गया था। यह FIR जनवरी 2026 में IPC के सेक्शन 376 (रेप) और BNS के सेक्शन 69 के तहत अपराधों के लिए दर्ज की गई थी। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं के क्रम से पता चलता है कि यह सिर्फ़ "रिश्ते में खटास" का मामला नहीं था, बल्कि आवेदक को बार-बार शादी का भरोसा दिलाने का मामला था, जबकि आवेदक को पता था कि उसका परिवार 'कुंडली' मिलाने पर ज़ोर दे रहा है।


आरोपी ने तोड़ा भरोसा: कोर्ट

कोर्ट ने कहा- "इस बात से कोई झगड़ा नहीं हो सकता कि सिर्फ़ इसलिए क्रिमिनल लॉ लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि रिश्ता टूट गया है या शादी नहीं हो पाई है। हालांकि, इस समय मौजूदा मामला एक अलग आधार पर है।" कोर्ट ने कहा- "पहले दिए गए भरोसे के बावजूद, कुंडली न मिलने के आधार पर शादी से इनकार करना, पहली नज़र में आवेदक द्वारा किए गए वादे की प्रकृति और सच्चाई पर सवाल उठाता है। इस समय ऐसा व्यवहार BNS के सेक्शन 69 के तहत अपराध को आकर्षित करेगा।" कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि वह आरोपों की प्रकृति, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए मटीरियल और इस बात को देखते हुए राहत देने के लिए तैयार नहीं है कि मामले में चार्जशीट अभी तक फाइल नहीं की गई है। 


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Content Writer

vasudha

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