कोर्ट का बड़ा फैसला- पति का पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाना अपराध नहीं

punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 05:25 PM (IST)

नारी डेस्क: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यौन शोषण और दहेज उत्पीड़न के मामले में FIR रद्द करने की मांग वाली एक पति की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि "शादी में सहमति कानूनी तौर पर महत्वहीन है।" कोर्ट ने कहा कि रेप से जुड़े कानूनों में दिए गए अपवादों के संदर्भ में, अगर कोई पति अपनी बालिग पत्नी के साथ कोई भी यौन संबंध या यौन क्रिया करता है, तो उसे रेप नहीं माना जाएगा। 
 

यह भी पढ़ें: मौत के मुंह से निकलने के बाद पापा बने अनुराग डोभाल


पत्नी ने पति पर लगाए थे ये आरोप

जस्टिस मिलिंद रमेश पाडके की बेंच एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें क्रूरता, अप्राकृतिक अपराध, जानबूझकर चोट पहुंचाना, अश्लील हरकतें और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई थी।  पाडके ने कहा कि भले ही शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए ज़बरदस्ती "अप्राकृतिक कृत्यों" के आरोपों को मान भी लिया जाए, फिर भी वे पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते के दायरे में ही आते हैं, और इसलिए उन्हें अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने आगे कहा- "IPC की धारा 375 के अपवाद 2 के तहत, अगर कोई पति अपनी पत्नी (जो नाबालिग न हो) के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया करता है, तो उसे रेप नहीं माना जाएगा।"


FIR को लेकर कोर्ट ने कही ये बात

अभियोजन पक्ष ने बताया कि इस जोड़े ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी, और पत्नी के परिवार ने दहेज के तौर पर ₹4 लाख नकद, साथ ही गहने और घरेलू सामान दिए थे। इसके बावजूद, पति ने कथित तौर पर ₹6 लाख की मांग की, और पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके ससुर ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया।अदाल त ने सबसे पहले यह फैसला दिया कि FIR रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर, और तभी किया जाना चाहिए जब कोई अपराध सामने न आ रहा हो। मौजूदा मामले में, यह पाया गया कि FIR में केवल "सामान्य और अस्पष्ट आरोप" लगाए गए हैं, और किसी भी "विशिष्ट प्रत्यक्ष कार्य" का ज़िक्र नहीं किया गया है।अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी ने अपनी ननद के खिलाफ किसी भी विशिष्ट कार्य का आरोप नहीं लगाया था, और इसलिए अदालत ने ननद के खिलाफ दर्ज FIR और आगे की सभी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया। 
 

यह भी पढ़ें: फेमस एक्टर की 44 साल की उम्र में मौत, ड्रग मामले में जा चुके हैं जेल
 

FIR से हटेगी धारा 377

पति पर लगे आरोपों पर फ़ैसला सुनाते हुए, कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा पत्नी के साथ किया गया यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार नहीं माना जाएगा। बेंच ने दोहराया कि बलात्कार के दायरे को बढ़ाया गया है, ताकि इसमें ओरल और एनल पेनेट्रेशन जैसे कृत्य भी शामिल हो सकें। कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि अगर ऐसे कृत्य शादीशुदा ज़िंदगी के दौरान होते हैं, तो उन पर IPC की धारा 377 लागू नहीं होगी। इसलिए, इस धारा के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया गया। इस बीच, कोर्ट ने पति के ख़िलाफ़ चल रही दूसरी कार्यवाहियों को रद्द नहीं किया।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static