ऑक्सीजन भी बन सकती है जानलेवा! मालदीव में स्कूबा डाइविंग के दौरान 5 लोगों की मौत
punjabkesari.in Sunday, May 17, 2026 - 02:16 PM (IST)
नारी डेस्क: समुद्र की गहराइयों में छिपी खूबसूरत दुनिया को करीब से देखने का सपना कई लोग देखते हैं। यही वजह है कि स्कूबा डाइविंग जैसी एडवेंचर एक्टिविटी दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। लेकिन रोमांच से भरी यह गतिविधि जरा सी लापरवाही होने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। हाल ही में मालदीव में हुई एक दर्दनाक घटना ने इसी खतरे को उजागर कर दिया है, जहां स्कूबा डाइविंग के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्ट्स में इस हादसे की वजह “ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” बताई जा रही है, जो गहरे पानी में होने वाला बेहद खतरनाक मेडिकल कंडीशन माना जाता है।
160 फीट गहराई में हुआ दर्दनाक हादसा
बताया जा रहा है कि यह हादसा मालदीव के वावू एटोल इलाके के पास हुआ। यहां इटली से आए पर्यटकों का एक समूह समुद्र के अंदर मौजूद अंडरवॉटर गुफाओं को एक्सप्लोर करने के लिए डाइविंग कर रहा था। सभी गोताखोर लगभग 160 फीट की गहराई तक पहुंचे थे, लेकिन डाइविंग के बाद वे सुरक्षित वापस सतह पर नहीं लौट सके। इस हादसे में प्रसिद्ध समुद्री जीव वैज्ञानिक मोनिका मोंटेफाल्कोन और उनकी 20 वर्षीय बेटी समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में रिसर्च फेलो म्यूरियल ओडेनिनो, मरीन बायोलॉजी ग्रेजुएट फेडेरिको गुआल्तियेरी और डाइविंग इंस्ट्रक्टर जियानलुका बेनेडेट्टी भी शामिल थे। इस घटना के बाद मालदीव प्रशासन और डाइविंग विशेषज्ञों ने जांच शुरू कर दी है।

क्या होती है ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी?
ऑक्सीजन इंसानी जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही ऑक्सीजन शरीर के लिए खतरनाक बन सकती है। इसे ही “ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति समुद्र की बहुत ज्यादा गहराई में जाता है तो वहां पानी का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। इस दबाव की वजह से शरीर में ऑक्सीजन का असर सामान्य से कहीं ज्यादा हो जाता है। अगर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा जरूरत से अधिक पहुंच जाए, तो यह दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों पर बुरा असर डाल सकती है।
ज्यादा ऑक्सीजन कैसे बनती है खतरा?
आमतौर पर लोग मानते हैं कि ज्यादा ऑक्सीजन शरीर के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन गहरे समुद्र में स्थिति बिल्कुल अलग होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक दबाव में ऑक्सीजन शरीर के अंदर जहरीले रिएक्शन पैदा कर सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर दिमाग और सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। डाइविंग के दौरान यदि किसी व्यक्ति को “सेंट्रल नर्वस सिस्टम ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” हो जाए, तो उसकी स्थिति कुछ ही सेकंड में गंभीर हो सकती है। पानी के अंदर अचानक दौरा पड़ना या बेहोशी आने से डूबने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के क्या लक्षण हैं?
ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इसमें चक्कर आना, घबराहट महसूस होना, आंखों के सामने धुंधलापन, मतली, मांसपेशियों में झटके और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं शामिल हैं। कई मामलों में व्यक्ति को अचानक दौरे भी पड़ सकते हैं। समुद्र के अंदर ऐसी स्थिति पैदा होने पर डाइवर खुद को संभाल नहीं पाता और हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
गुफाओं में डाइविंग क्यों होती है ज्यादा खतरनाक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अंडरवॉटर केव यानी समुद्र के अंदर बनी गुफाओं में डाइविंग करना सामान्य स्कूबा डाइविंग की तुलना में कहीं ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है। वहां रोशनी बेहद कम होती है और कई बार पानी का बहाव भी तेज होता है। ऐसी जगहों पर घबराहट बढ़ने से सांस तेज चलने लगती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रभाव और ज्यादा बढ़ सकता है। इसके अलावा खराब मौसम, थकान, तनाव और गलत गैस मिश्रण का इस्तेमाल भी हादसे की बड़ी वजह बन सकते हैं।
स्कूबा डाइविंग करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्कूबा डाइविंग हमेशा प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर की निगरानी में ही करनी चाहिए। गहराई के अनुसार सही गैस मिश्रण का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा डाइविंग से पहले स्वास्थ्य जांच, मौसम की जानकारी और सुरक्षा उपकरणों की जांच करना भी जरूरी माना जाता है। किसी भी तरह की घबराहट या शारीरिक परेशानी महसूस होने पर तुरंत सतह पर लौटने की कोशिश करनी चाहिए।

रोमांच के साथ जरूरी है सावधानी
स्कूबा डाइविंग रोमांच से भरपूर अनुभव हो सकता है, लेकिन समुद्र की गहराइयों में छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है। मालदीव में हुई यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि एडवेंचर एक्टिविटीज में उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।

